चित्रकूट। गर्मी शुरू होते ही एक ओर जहां भूगर्भ जलस्तर नीचे गिर रहा है, तो दूसरी तरफ शहर में हर रोज़ हजारों लीटर शुद्ध पेयजल बहाया जा रहा है। वाहन धुलाई, घरों की सफाई, बगीचों की सिंचाई में पानी की बर्बादी हो रही है। मानिकपुर ब्लॉक के कल्याणपुर मजरा हल्दी डांडी समेत कई क्षेत्रों में पेयजल संकट है।
शहर में करीब 50 वाहन धुलाई सेंटर संचालित हो रहे हैं। इनमें से लगभग 20 सेंटरों पर रोज़ाना 30 से 40 वाहन धुलते हैं, जबकि अन्य सेंटरों पर 15 से 20 वाहन प्रतिदिन साफ किए जाते हैं। एक चार पहिया वाहन की धुलाई में करीब 120 लीटर और दो पहिया में लगभग 70 लीटर पानी खर्च होता है। औसतन हर वाहन पर 60 लीटर पानी बहाया जा रहा है। इस हिसाब से शहर में हर दिन करीब छह हजार लीटर शुद्ध पेयजल बर्बाद हो रहा है।
यह महीने भर में 1.08 लाख लीटर से अधिक पहुंच जाता है। यह बर्बाद हो रहा पानी करीब 50 लोगों की दैनिक जरूरत पूरी कर सकता है। पाठा क्षेत्र, मानिकपुर, रामनगर, हल्दी डांडी गांव, तरौहा और सीतापुर सहित कई गांवों में गर्मी के दौरान पानी का संकट रहता है। इनमें से कुछ क्षेत्रों में टैंकरों से पानी की आपूर्ति की जा रही है।
दो घंटे की सप्लाई, फिर सूखे नल
सीतापुर निवासी यश बताते हैं कि सुबह सिर्फ दो घंटे ही पानी की सप्लाई मिलती है। इसके बाद पूरे दिन नलों में पानी नहीं आता। कई बार शिकायत की गई, लेकिन हालात जस के तस हैं।
धुलाई पर बर्बाद होता पानी
पाठा क्षेत्र के निवासी जगदीश सिंह का कहना है कि गर्मी बढ़ने के साथ पानी की किल्लत और बढ़ जाती है। ऐसे में सबसे पहले धुलाई सेंटरों पर रोक लगनी चाहिए, जहां बड़े पैमाने पर पानी बर्बाद हो रहा है।
बोले जिम्मेदार
वाहन धुलाई सेंटरों को कई बार नोटिस दी गई है। जुर्माना लगाया गया। इसके बाद भी लगातार कार्रवाई की जाती है। जल्द ही अभियान चलाया जाएगा और ऐसे लोगों को चिह्नित कर जुर्माना होगा। -नरेंद्र गुप्ता, अध्यक्ष, नगर पालिका परिषद।
फोटो 12 सीकेटीपी-22-वाहन की धुलाई के दौरान बहाता कर्मचारी। संवाद
फोटो 12 सीकेटीपी-22-वाहन की धुलाई के दौरान बहाता कर्मचारी। संवाद