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फसलों का भारी नुकसान, लेखपाल पर पक्षपात का आरोप

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राजापुर (चित्रकूट)। बेमौसमी बरसात और ओलावृष्टि से किसान की फसलें बर्बाद हो गई हैं। ऐसे में किसान मुआवजा पाने के लिए सर्वे रिपोर्ट पर निर्भर हैं। तहसील क्षेत्र के कई गांव के किसानोें ने लेखपालों में मनमानी रिपोर्ट लगाने व अपात्रों को अधिक मुआवजा दिलाने के प्रयास करने के आरोप लगाए हैं।
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भदेदू गांव के किसान रोशन सिंह व पुनीत कुमार उपाध्याय के साथ कई किसानों ने उपजिलाधिकारी राजापुर राहुल कश्यप विश्वकर्मा को शिकायती पत्र देकर कहा कि गांव के लेखपाल अपने मन मुताबिक बाढ़ पीड़ितों की कैटेगरी को वृहद काश्तकार एवं लघु काश्तकार के रूप में बनाया है। जिसमें फ सलों के नुकसान का स्थलीय निरीक्षण करना जरूरी था। मौके पर न जाकर एक जगह बैठकर लेखपाल द्वारा सहायता राशि की सूची अपने चहेतों के अनुरूप बनाई है। जिसमें वृहद काश्तकारों के साथ किये गए भेद भाव की वजह से सही मुयावजा न बनाये जाने के कारण मुआवजा की धनराशि का बहुत नुकसान हुआ है। तहसील राजापुर से क्षेत्रीय लेखपालों के द्वारा बाढ़ पीड़ितों को जो आर्थिक सहायता दी जा रही है वह ऊंट के मुंह में जीरा के समान है तथा कुछ ऐसे लघु और सीमांतों का नाम जोड़ा गया है जिनके खेतों में किसी भी प्रकार की कोई जिंस नहीं बोई गई थी।
शिकायतकर्ता रोशन सिंह ने बताया है कि खरीफ की फसल पूर्णरूपेण यमुना व पैश्वनी नदी के जल से जलमग्न हो गई थी जिसके कारण बडे़ किसानों की पूरी की पूरी फसल नष्ट हो गई थी। तब किसी प्रकार बडे़ किसानों ने बैंकों से व साहूकारों से कर्ज लेकर खाद बीज की व्यवस्था कर रवि की फसल बोया था लेकिन 6 मार्च और 16 मार्च को अतिवृष्टि ओला तूफ ान से संपूर्ण फसलें नष्ट हो गई हैं। सबसे ज्यादा बडे़ काश्तकार इस दैवीय आपदा से प्रभावित हुए हैं। जिन्हें तहसील प्रशासन की ओर से मात्र दिखावे के रूप में यह प्रोत्साहन धनराशि के रूप में दी जा रही है।
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रोशन सिंह ने बताया की दैवीय आपदा में चाहे वृहद किसान हो चाहे लघु सीमान्त किसान हो इन सबका नुकसान हुआ है नुकसान के अनुसार धन का आवंटन करने की शासन एवं प्रशासन से माँग किया है। इस मौके पर रामकिशोर पांडेय, पंकज द्विवेदी, विनय कुमार सिंह , नरेंद्र सिंह, पुनीत, उज्जैन सिंह, किंकर प्रसाद आदि किसान मौजूद रहे।
इस मामले में लेखपाल शशांक द्विवेदी ने बताया कि भदेदू गांव चकबंदी का गांव है। राजस्व के सारे रिकॉर्ड चकबंदी लेखपाल के पास होने की वजह से किसानों से खतौनी की प्रति ली गई थी। किसानों द्वारा उपलब्ध कराई गई खतौनी के अनुसार 6800 रुपये प्रति हेक्टेयर के हिसाब से मुआवजा राशि बनाया है। किसी किसान के साथ भेदभाव नही किया गया। उन पर लगाए गए आरोप गलत है।
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