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Chitrakoot News: प्रयोगशाला बनी नहीं, पुस्तकालय के अधूरे निर्माण से जूझ रहे छात्र

Mon, 22 Sep 2025 12:11 AM IST
कानपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, चित्रकूट
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फोटो 21 सीकेटीपी-3- परिचय- जिले के प्राथमिक विद्यालय में योगा करती छात्राएं। फाइल फोटो - फोटो : कासगंज में नवरात्र पर्व को लेकर चामुंडा माता मंदिर में सजावट करते कारीगर। संवाद
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चित्रकूट। प्रोजेक्ट अलंकार के तहत जिले के छह राजकीय विद्यालयों में प्रयोगशाला, पुस्तकालय, शौचालय और मल्टीपरपज हॉल के निर्माण के लिए करीब 3.28 करोड़ रुपये स्वीकृत हुए हैं। इनमें से पहली किस्त के रूप में लगभग 2.40 करोड़ रुपये भी जारी हो चुके हैं। इसके बावजूद भवन व संसाधनों का निर्माण अधूरा पड़ा है। समय पर काम पूरे न होने के कारण छात्र-छात्राएं पढ़ाई और बुनियादी सुविधाओं के अभाव से जूझ रहे हैं। कई विद्यालयों में कक्षाएं तंग कमरों और अस्थायी इंतजामों में चल रही हैं।
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जीआईसी बरगढ़ में भौतिक विज्ञान प्रयोगशाला के लिए 17.50 लाख, जीव विज्ञान प्रयोगशाला के लिए 16.73 लाख, मल्टीपरपज हॉल के लिए 47.46 लाख और पुस्तकालय निर्माण के लिए 18.56 लाख रुपये स्वीकृत हुए। इसमें से 50.15 लाख की पहली किस्त जारी भी हुई, लेकिन अब तक केवल 49 प्रतिशत कार्य ही पूरा हो सका है।

जीजीआईसी कर्वी को टॉयलेट ब्लॉक के लिए 23.02 लाख, मल्टीपरपज हॉल के लिए 47.46 लाख और पुस्तकालय के लिए 18.56 लाख रुपये स्वीकृत हुए थे। 44.02 लाख की राशि जारी होने के बावजूद यहां निर्माण अधूरा पड़ा है और छात्र-छात्राओं को सुविधा नहीं मिल पा रही।
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राजकीय हाई स्कूल गौहानीकला को मल्टीपरपज हॉल के लिए 47.46 लाख और पुस्तकालय के लिए 18.56 लाख रुपये स्वीकृत हुए। 33 लाख की किस्त जारी होने के बाद भी प्रगति केवल 47 प्रतिशत रही।

राजकीय हाई स्कूल मण्डौर को मल्टीपरपज हॉल के लिए 47.46 लाख रुपये स्वीकृत हुए, जिसमें से 23.73 लाख की पहली किस्त 15 मार्च 24 को जारी हुई थी। भूमि उपलब्ध न होने से यहां अब तक निर्माण कार्य शुरू ही नहीं हो पाया।

राजकीय हाई स्कूल मुर्का में टॉयलेट ब्लॉक के लिए 22.01 लाख, मल्टीपरपज हॉल के लिए 47.46 लाख और पुस्तकालय के लिए 18.56 लाख रुपये स्वीकृत हुए। 44.03 लाख जारी होने के बावजूद केवल 43 प्रतिशत काम ही पूरा हो पाया है।

इसी तरह राजकीय हाई स्कूल असोह को मल्टीपरपज हॉल निर्माण के लिए 47.46 लाख स्वीकृत हुए थे। 23.73 लाख की किस्त मिलने के बाद यहां 53 प्रतिशत प्रगति दर्ज की गई।

छात्रों को हो रही परेशानी

विद्यालयों में पुराने प्रयोगशाला, शौचालय और पुस्तकालय के भवन तो बने हैं, लेकिन वे अब उपयोग लायक नहीं हैं। उपकरण, फर्नीचर और साफ-सफाई की कमी से छात्र इन्हें इस्तेमाल नहीं कर पा रहे। बदलते शैक्षिक परिवेश में आधुनिक प्रयोगशाला और सुसज्जित पुस्तकालय की आवश्यकता है, ताकि छात्र-छात्राएं प्रैक्टिकल और उच्च अध्ययन में पीछे न रहें।

इनसेट

निर्माण कार्य की जिम्मेदारी आवास विकास परिषद की है। जिन्हें निर्देश दिया गया है कि अधूरे काम जल्द पूरे कर इन्हें उपयोग लायक स्थिति में लाए। इसके साथ ही जिस प्रोजेक्ट पर अभी द्वितीय किस्त नहीं मिली है। वहां के लिए डिमांड भेजा गया है।
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-रविशंकर जिला विद्यालय निरीक्षक

इनसेट
अब तक की स्थिति

कुल स्वीकृत राशि: 3.28 करोड़ रुपये
जारी राशि: 2.40 करोड़ रुपये
औसत प्रगति: 45 प्रतिशत से भी कम
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