चित्रकूट। मंदाकिनी ने ऐसी तबाही मचाई जिसे ग्रामीण वर्षों तक नहीं भूल पाएंगे।
अमानपुर मजरे के कुशवाहा पुरवा...बाढ़ का पानी जब इस गांव में घुसा तो खेतों में तैयार सब्जी और फूल की फसल तेज बहाव में बह गई। 35 से अधिक कच्चे मकान गिर गए, जबकि कई पक्के मकानों की दीवारों में गहरी दरारें आ गई हैं। जो मकान बचे हैं वह भी रहने लायक नहीं रह गए हैं।
बाढ़ का पानी उतरने के बाद भी त्रासदी के निशान बाकी हैं। गांव की गलियों में घुटनों तक कीचड़ और मलबा है। कई घरों में अब भी जलभराव है। अनाज, कपड़े, बर्तन, चारपाई भीगकर खराब हो गया। महिलाओं को चूल्हा जलाने तक की जगह नहीं मिल रही है। बाढ़ के पानी में स्कूल की किताबें, कॉपियां, बैग सब पानी में भीगकर गल गए। कई बच्चों के आधार कार्ड, आय प्रमाण पत्र जैसे जरूरी दस्तावेज भी बाढ़ में बह गए हैं।
पशुपालकों के सामने चारे का संकट खड़ा हो गया है। ग्रामीणों ने सर्दियों के लिए घरों में करीब 100 क्विंटल से अधिक भूसा इकट्ठा करके रखा था जो पूरा का पूरा पानी में भीगकर सड़ गया है। अब पशुओं को खिलाने के लिए भूसा नहीं बचा है।
मकान में दरारें, कुछ नहीं बचा
बाढ़ में पानी घर के ऊपर से बह रहा था। पूरा सामान बह गया, बच्चों की किताबों के साथ जरूरी प्रमाण पत्र भी नहीं बचे। मकान में दरारें आ गई हैं, परिवार खुले में रहने को मजबूर है।- रामनरेश कुशवाहा।
12 बीघा फसल बर्बाद, भूसा भी सड़ा
उनका और भाई की 12 बीघे में लगी तैयार सब्जी की फसल बह गई। घर में रखा पशुओं का भूसा भी खराब हो गया। मवेशियों को खिलाने के लिए कुछ नहीं बचा है। अब गुजर-बसर मुश्किल है।- जगदीश।
बोले जिम्मेदार-
जिले में बाढ़ से हुए नुकसान का सर्वे लगातार कराया जा रहा है, प्रभावितों को नियमानुसार मुआवजा दिया जा रहा है, सर्वे का काम अभी भी जारी है।- पुलकित गर्ग, जिलाधिकारी।
14 सीकेटीपी-22-गिरे मकान के बीच रहता परिवार। संवाद