बछरन गांव में मृतक बालक के परिजनों से जानकारी लेते कांग्रेसी नेता पंकज मिश्रा।
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बछरन गांव में बालक की हत्या पर शुरू हुई सियासत पर पुलिस ने पूर्ण विराम लगा दिया। तीसरे दिन घटना के खुलासे के बाद तय हो गया कि बकरी चोरी का विरोध करना ही बालक की हत्या का कारण बना। पुलिस ने हत्या में प्रयुक्त कुल्हाड़ी व कमांडर जीप के साथ आठ गायब बकरियों को भी बरामद कर लिया है।
गौरतलब है कि पहाड़ी थानाक्षेत्र के बछरन गांव में 30 जून की शाम को बकरी चराने गए कल्लू उर्फ आलोक (14) की कुछ लोगों ने कुल्हाड़ी से गला रेतकर हत्या कर दी थी और बकरियां लूट ली थीं। जिसके विरोध में ग्रामीणों ने गांव निवासी आरोपी के चाचा की गुमटी जलाकर राजापुर मार्ग पर जाम लगा दिया था।
घटना के बाद शुक्रवार को भाजपा, बसपा व कांग्रेस दल के नेताओं ने गांव में जाकर घटना की जानकारी ली। इसके बाद पुलिस अधीक्षक केके चौधरी के कड़े निर्देश के बाद सक्रिय पहाड़ी थानाध्यक्ष रामेंद्र तिवारी ने शनिवार को घटना का खुलासा कर दिया।
मुखबिर की सूचना पर पुलिस ने रैपुरा निवासी अहमद अली पुत्र अलीम को उसके घर से दबोचा। उसके कब्जे से मृतक की गायब आठ बकरियां भी बरामद हुईं। इसके बाद पुलिस ने पहले से पकड़े गए मुख्य आरोपी फुद्दा उर्फ हुसैन के साथ दोनों की निशानदेही पर हत्या में प्रयुक्त कुल्हाड़ी नहर के पास से बरामद कर ली।
थानाध्यक्ष ने बताया कि हत्या फुद्दा और उसके भाई राजा उर्फ रज्जन ने मिलकर की इसके बाद अहमद ने पेड़ की डाल काटकर बकरियों को एकत्र किया, फिर सबको कमांडर में भरने लगे। तीनों ने शव को घसीटकर नहर के पास फेंक दिया। भागते समय कमांडर जीप से कुछ बकरियां कूद गईं लेकिन आठ बकरी लेकर अहमद रैपुरा भाग आया था।