बेराउर गांव के पुरवा में श्रीमद्भागवत कथा का शुभारंभ कलश यात्रा के साथ शुरू हुआ। पहले दिन आचार्य अरबिंद महाराज ने श्रीमद्भागवत कथा के महत्व के बारे में भक्तों को बताया। कहा कि श्रीमद्भागवत कल्पवृक्ष के समान है।
संगीतमयी श्रीमद्भागवत कथा का शुभारंभ होने से पहले यजमान इन्द्र बहादुर व ननकी देवी के घर से हाथी, घोड़ा के साथ कलश यात्रा निकाली गयी। कलश यात्रा यमुना नदी के किनारे पहुंची। जहां पूजापाठ किया गया। इसके बाद श्रीमद्भागवत कथा का शुभारंभ हुआ।
जिसमें आचार्य ने कहा कि श्रीमद्भागवत कथा कल्पवृक्ष और पके फल के समान है। जो भक्ति व त्याग की सीख देती है। इसके सुनने से व्यक्ति भवसागर पार कर जाता है। रामचरितमानस जीवन जीने की कला सिखाती हैै।
भागवत कथा में कथा व्यास के साथ आचार्य रितेश शास्त्री पंडित पंकज त्रिपाठी, ज्ञान सिंह व शिवशंकर सिंह, राजकुमार उपाध्याय, कमलेश बाबू, जितेन्द्र द्विवेदी, आजाद सिंह, चन्द्र द्विवेदी, जगदीश द्विवेदी, लक्ष्मीनारायण, राजा गर्ग आदि मौजूद रहे।
वहीं धर्मनगरी के श्रीधर धाम आश्रम में हो रहे श्री राम महायज्ञ के आठवें दिन पंजाबी भगवान आश्रम महंत राजकुमार दासजी ने महंत रामलोचनदास द्वारा काशी से लाये गये गुलाब पुष्पों व गुलाब जल से मंगल पीठाधिस्वर स्वामी माध्वाचार्य को गुलाल व पुष्प लगा कर होली उत्सव की शुरुआत की। इस मौके पर महंत दीपक दास, बारहभाई डांडिया के महामंडलेश्वर महंत रामकृष्ण दास महराज आदि मौजूद रहें।
इसी प्रकार शिवरामपुर के लैनाबाबा मंदिर में चल रही कथा में कथा व्यास प्रभाजी ने कहा कि रामचरितमानस जीवन में आदर्श को स्थापित करने की शिक्षा देती है। इस दौरान सैकड़ों भक्तगण मौजूद रहे।