चित्रकूट। बरगढ़ के कपड़ा कारोबारी अशोक केसरवानी के बेटे आयुष के अपहरण व हत्या के मामले में पुलिस मुठभेड़ में मारे गए आरोपी शातिर अपराधी कल्लू का शनिवार को पोस्टमार्टम हुआ। इस दौरान कल्लू के पिता मकसूद एक अन्य व्यक्ति के साथ पोस्टमार्टम हाउस पहुंचे। हालांकि, मीडिया द्वारा पूछे गए सवालों पर उन्होंने चुप्पी साधे रखी और कोई भी जवाब देने से साफ इन्कार कर दिया।
यह घटना शुक्रवार को हुई थी, जब पुलिस ने आयुष के अपहरण और हत्या में शामिल मुख्य आरोपी कल्लू कल्लू उर्फ साहबे आलम को मुठभेड़ में मार गिराया था। पुलिस के अनुसार, कल्लू एक शातिर अपराधी था और कई संगीन मामलों में वांछित था। आयुष के अपहरण और हत्या के बाद पुलिस उसकी तलाश में जुटी थी और सर्विलांस से लोकेशन ट्रेस होते ही कार्रवाई करते हुए उसे घेर लिया था। पुलिस का दावा है कि आत्मरक्षा में की गई कार्रवाई में कल्लू मारा गया।
शनिवार को अस्पताल के पोस्टमार्टम हाउस में आरोपी कल्लू के पिता मकसूद आए थे लेकिन वो मीडिया के सवालों का जवाब देने से बचते रहे। कैमरा चलाते ही दोनों चेहरा छुपाते रहे। पोस्टमार्टम हाउस में ही पुलिस ने पंचनामा भरा और पोस्टमार्टम कराया। शाम करीब साढ़े चार बजे पोस्टमार्टम पूरा हो सका। उसके बाद शव लेकर गांव चले गए।
पुलिस को चकमा देने के लिए कल्लू बदलता था नाम
चित्रकूट। कपड़ा व्यापारी अशोक केसरवानी के बेटे आयुष के अपहरण और गला दबाकर हत्या के मामले में पुलिस मुठभेड़ में मारा गया शातिर अपराधी कल्लू उर्फ साहबे आलम, प्रयागराज के घूरपुर थाने में हत्या समेत कई संगीन मामलों में वांछित था। वह हर चुनाव और त्योहारों में पुलिसिया कार्रवाई से बचने के लिए बरगढ़ को अपना नया ठिकाना बना चुका था और इरफान के साथ रहकर उसकी दुकान में बक्सा बनाने का काम करता था।
पोस्टमार्टम के लिए कल्लू के पिता मकसूद का आना स्वाभाविक था लेकिन मीडिया के सवालों से उनका बचना कई सवाल खड़े कर रहा है। कल्लू पुलिस को चकमा देने के लिए हर बार नए नाम के साथ घटना को अंजाम देता था यह बात पुलिस की छानबीन में सामने आई है। कल्लू उर्फ साहबे अमन उर्फ छोटका के खिलाफ घूरपुर थाने में पहला बार प्राथमिकी वर्ष 2019 में मारपीट, गाली गलौज और जान से मारने की धमकी देने में दर्ज गई थी।
इसके बाद इसी मामले में एक और प्राथमिकी दर्ज हुई थी। वर्ष 2020 में घूरपुर थाने में बेटू उर्फ साहबे इमाम के नाम से हत्या, छेड़खानी, बलवा और मारपीट की प्राथमिकी दर्ज की गई थी, जिसके चलते वह जेल भी गया था। इसके अलावा, साहबे आलम के नाम से भी एक प्राथमिकी दर्ज है। इससे पहले पीलीभीत जिले के सदर कोतवाली में वर्ष 2017 में साहबेज के नाम से एक प्राथमिकी दर्ज हुई थी।
इन गंभीर अपराधों के कारण ही उसके पिता मकसूद ने उसे इरफान के पास काम के लिए भेजा था लेकिन वहां भी उसने एक किशोर का अपहरण कर हत्या की वारदात को अंजाम दिया। यहां पर उसने कल्लू के नाम का इस्तेमाल किया।