चित्रकूट। पचास से ज्यादा बच्चों के यौन शोषण के आरोप में सीबीआई द्वारा गिरफ्तार किए गए सिंचाई विभाग के निलंबित अवर अभियंता रामभवन सरकारी आवास की जगह शोभा सिंह का पुरवा की बस्ती में किराये का मकान लेकर रहता था। यहां ठिकाना बनाने की सबसे बड़ी वजह यह थी कि यहां के बाशिंदे आर्थिक रूप से जहां कमजोर हैं, वहीं शिकार भी आसानी से उसको मुहैया हो जाता था।
सरकारी विभाग के इंजीनियर का नाम आते ही लोगों के सामने लोग में छवि उभरती है कि कि साहब को मोटा वेतन मिलता है। ऑलीशान मकान होगा, लेकिन बच्चों के यौन उत्पीड़न के मामले में फंसे सिंचाई विभाग के जूनियर इंजीनियर रामभवन का घर देखने के बाद यह बात सही नहीं लगती है। रामभवन ने सरकारी आवास की जगह शहर के शोभा सिंह का पुरवा की बस्ती के संकरी सड़क पर मकान लिया था।
अमर उजाला टीम ने रविवार की सुबह एसडीएम कालोनी के पीछे स्थित शोभा सिंह का पुरवा में आरोपी जेई के घर में पहुंची। जिस संकरी सड़क पर जेई ने किराये पर मकान ले रखा है, वहां चार पहिया वाहन का आनाजाना मुश्किल है। रास्ता भी पक्का नहीं है। फिर भी यहां बच्चों के यौन उत्पीड़न के मामले में फंसे जेई ने आशियाना बना रखा था, ताकि यहां रहने वाले आर्थिक रूप से कमजोर लोगों के मासूमों को अपना शिकार बना सके।
सूत्रों का कहना है कि आरोपी जेई इरादों को पूरा करने में काफी हद कर सफल भी रहा। नाम न छापने पर शर्त पर युवक ने बताया कि जेई जब भी घर में रहता था आसपास के छोटे बच्चों को खेलने को इलेक्ट्रानिक खिलौने, मोबाइल फोन और अन्य तरह के लालच देकर घर बुलाता था, फिर यौन शोषण करता था। अधिकांश बच्चे उसकी हरकतों को समझ नहीं पाते थे।
जेई की करतूत सामने आने के बाद उसके घर के आसपास रहने वालों में गुस्सा तो है, पर मुंह खोलने को तैयार नहीं हैं। कुछ बच्चों से टीम ने बात की, तो कहा कि अंकल गंदे थे। शुक्रवार को कुछ अंकल (सीबीआई के लोग) आए थे, हमने उनको सब बता दिया। बच्चे आगे कुछ बता पाते इसके पहले उनके घरवालों की नजर अमर उजाला टीम पर पड़ी। उन लोगों ने खाना खाने की बात कहकर घर के अंदर बुला लिया।