राष्ट्रपति से पुरस्कार लेते जगद्गुरु रामभद्राचार्य
- फोटो : तुलसी पीठ
चित्रकूट। जगद्गुरु स्वामी रामभद्राचार्य को ज्ञानपीठ पुरस्कार मिलने पर साधु-संतों और सामाजिक संगठनों ने खुशी जताई है। जगदगुरु को राष्ट्रपति द्रोपदी मुर्मू ने शुक्रवार को ज्ञानपीठ पुरस्कार से सम्मानित किया था।
नई दिल्ली के विज्ञान भवन में शुक्रवार को आयोजित समारोह में राष्ट्रपति ने जगद्गुरु रामभद्राचार्य को 58वां ज्ञान पीठ पुरस्कार प्रदान किया। राष्ट्रपति ने साहित्य की भूमिका पर प्रकाश डालते हुए कहा कि साहित्य समाज को जोड़ने और जागरूक करने का कार्य करता है। कहा कि भारतीय ज्ञानपीठ ट्रस्ट वर्ष 1965 से विभिन्न भारतीय भाषाओं के श्रेष्ठ साहित्यकारों को सम्मानित कर रहा है।
जगद्गुरु की प्रशंसा करते हुए कहा कि उन्होंने शारीरिक सीमाओं के बावजूद साहित्य और समाजसेवा के क्षेत्र में अद्भुत योगदान दिया है। उनका जीवन आने वाली पीढि़यों के लिए प्रेरणा का स्रोत है।
शनिवार को तुलसी पीठाधीश्वरी के उत्तराधिकारी आचार्य रामचंद्र दास ने कहा कि जगद्गुरु रामभद्राचार्य ने चित्रकूट में दिव्यांगों के लिए विश्वविद्यालय बनाकर सरकार को दिया है। उनकी निस्वार्थ समाजसेवा का लाभ हजारों दिव्यांगों को मिल रहा है। जगद्गुरु के सम्मान पर बुंदेली सेना जिलाध्यक्ष अजीत सिंह ने कहा कि पहले पद्मविभूषित अब ज्ञानपीठ पुरस्कार पाने वाले जगद्गुरु से धर्मनगरी गौरवान्वित महसूस करती है। धर्मनगरी के प्रमुख संतों और समाजसेवियों ने खुशी जताई है।