चित्रकूट। राजापुर में दस लाख के बिल को पचास हजार और सवा तीन लाख के बिल को डेढ़ हजार रुपये से भी कम में जमा कराने के मामले को बिजली विभाग के अधिकारियों ने गंभीरता से लिया है। एमडी के निर्देश पर एसई ने अधिशासी अभियंता समेत दो सदस्यीय जांच टीम गठित की हैं। संबंधित रिकार्ड कार्यालय मंगाए गए हैं। इसी बीच राजापुर के दो क्लर्क को भी हटाया गया है।
अमर उजाला में पांच अगस्त के अंक में दस लाख का बिल 50 हजार तो तीन लाख का डेढ़ हजार रुपये में निपटाया शीर्षक से खबर प्रकाशित होने के बाद जांच शुरु की गई है। एमडी आगरा पंकज कुमार ने बताया कि रिपोर्ट चित्रकूट कार्यालय से मांंगी गई है। ऑनलाइन होने वाले काम के विवरण का मिलान किया जारहा है।
चित्रकूट के एसई आरके यादव ने बताया कि मामले की जांच शुरु की गई है। दो सदस्यीय टीम एक सप्ताह में जांच रिपोर्ट देगी। प्रथम दृष्टया ऑनलाइन बिल सुधार और घपले को लेकर अधिशासी अभियंता शिवकुमार पर आरोप लगे हैं। उनसे पूरे रिकार्ड मंगाए गए हैं। कार्यालय में दो क्लर्क विनोद कुमार व गोविंद भारती को शिकायत के आधार पर हटाया गया है।
कुछ लोग बेवजह फंसा रहे हैं
अधिशासी अभियंता शिवकुमार ने बताया कि उनके खिलाफ विभाग के कुछ लोग ही बेवजह आरोप लगा रहे हैं। लापरवाही पर कई क्लर्क व अन्य कर्मचारियों की शिकायत हुई तो वह सब मिलकर उन्हें फंसा रहे हैं। जो रिपोर्ट मांगी गई है वह भेज रहेहैं। एक क्लर्क अवकाश पर है इससे ऑनलाइन पूरा डॉटा अभी सामने नहीं आया। दो दिन में भेज दिया जाएगा।
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कांग्रेस ने निष्पक्ष जांच की मांग की
कांग्रेस के राष्ट्रीय कार्यकारिणी के सदस्य पंकज मिश्रा ने बताया कि विभाग में गड़बड़ी करने वाले अधिकारियों को बचाने का प्रयास किया जा रहा है। उपभोक्ता बिल सुधरवाने के लिए भटकता रहता है। पहुंच वाले और रिश्वत देने वालों का काम आसानी से हो रहा है। इसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।