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Chitrakoot News: बिना लाइसेंस 20 साल से कर रहा था पटाखों का कारोबार

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पटाखों के धमाके के बादगली मोहल्ला में छाया धुआं।संवाद - फोटो : पटाखों के धमाके के बादगली मोहल्ला में छाया धुआं।संवाद
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चित्रकूट/मानिकपुर। वाल्मीकि नगर में लगभग 40 साल से रह रहे इश्तियाक का पटाखों का पुश्तैनी कारोबार है। वह करीब 20 साल से इस धंधे में है। 20 बोरो से अधिक मात्रा में ज्यादा आवाज वाले पटाखे व अन्य आतिशबाजी मिली है।
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बताते हैं वह बाहर से कच्चा माल लाकर तेज आवाज वाले खतरनाक पटाखे बनाता है। इसके बाद भी उसके पास स्थायी लाइसेंस नहीं है। यह बात अधिकारियों ने भी मानी है। वह दीपावली पर पटाखा बेचने का अस्थायी लाइसेंस लेता है। इसी के सहारे स्थानीय प्रशासन की कृपा से बस्ती के अंदर पटाखे का उसका कारोबार चल रहा था।
बुधवार को पटाखों में आग लगने से हुए विस्फोट इसका भंडाफोड़ जिम्मेदार बगले झांक रहे हैं। पूछताछ में एसडीएम व अपर एसपी ने भी माना कि इसके पास पटाखा बनाने का कोई लाइसेंस नहीं है फिर कैसे बीच बस्ती में भारी मात्रा में विस्फोटक घर के अंदर स्टॉक किए है।
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बुधवार को घटना के बाद जब दमकल टीम ने आग पर काबू पा लिया तो पूरे घर की पुलिस व राजस्व विभाग की टीम तलाशी ली। 20 बोरो से अधिक मात्रा में ज्यादा आवाज वाले पटाखे व अन्य आतिशबाजी मिली है। इसके अलावा इसकी एक गोदाम भी है जो बस्ती के बाहर है उसमें भी भारी मात्रा में पटाखों का स्टॉक बताया गया है। इस घटना के बाद रात को प्रशासन व पुलिस की टीम इश्तियाक अहमद के घर व गोदाम पहुंचकर जांच पड़ताल कर रही है। पटाखों में यह भी देखा जा रहा है कि यह कितने शक्तिशाली हैं। कहीं इनका प्रयोग किसी और काम के लिए तो नहीं होता है।
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पटाखे वाले के नाम से मशहूर है इश्तियाक
मानिकपुर। कस्बे ही नहीं बल्कि जिले में इश्तियाक अहमद पटाखा वाले का नाम जाना जाता है। इसी काम से ही उसके परिवार का भरणपोषण भी होता है। मुख्यालय निवासी पटाखा बेचने वाले दुकानदार संदीप द्विवेदी व संजय गुप्ता ने बताया कि दिवालीमें वह सब माल घटने पर मानिकपुर से ही लेेते हैं। जो सस्ता व जल्दी मिल जाता है। बताया गया है कि इश्तियाक पटाखा बनाने का सामान लाकर ज्यादातर शादी विवाह व दिवाली वाले पटाखे घर व गोदाम में ही बनाता था। चार अन्य लोग काम में मदद करते हैं। यह माल कानपुर, कोलकाता व गाजीपुर से लाता है। इसके बाद इसका पटाखा मुख्यालय के अलावा सतना, शंकरगढ़, रींवा जिले के कई शहर गांव में बिकता है। यहांके दुकानदार माल ले जाते हैं।
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स्टाॅक करने का नहीं है लाइसेंस
मानिकपुर एसडीएम मो. जसीम ने बताया कि इश्तियाकअहमद के पास सिर्फ दीवाली के समय ही पटाखा बिक्री का अस्थायी लाइसेंस रहता है। पटाखा बनाने या भारी मात्रा में स्टॉक करने का कोई लाइसेंस नहीं है। इसका रिकार्ड तहसील कार्यालय से लिया गया है। जांच पड़ताल की जा रही है। बगैर लाइसेंस इतना बड़ा आतिशबाजी का काम करना और विस्फोटक पदार्थ बनाने काम बस्ती में चल रहा था। इस मामले में पुलिस कार्रवाई करेगी।
अपर एसपी सत्यपाल सिंह ने बताया कि इश्तियाकअहमद के पास अस्थायी पटाखा बिक्री व स्टॉक का लाइसेंस रहता है। जो दिवाली में बनता है लेकिन आज जो कुछ सामने आया है उसकी पूरी जांच कराई जाएगी। मौके से मिले पटाखे व पटाखे बनाने की सामग्री समेत सब बरामद किया गया है। घायल के ठीक होने के बाद पूछताछ की जाएगी। इसके बाद नियमानुसार कार्रवाई होगी।
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ये सवाल, जिनका किसी के पास नहीं जवाब
चित्रकूट। जब अधिकारी मान रहे हैं कि इसके पास स्थाई लाइसेंस बेचने या भंडारण का नहीं है तो फिर कैसे लगभग 20 साल से काम धड़ल्ले से चल रहा है। इस काम की अनुमति देने के लिए किसकी शह है। कौन दोषी है। मानिकपुर कस्बा ज्यादा बड़ा भी नहीं है। लगभग पांच किमी के दायरे में यह मोहल्ला और अधिकारियों व पुलिस के कार्यालय आवास हैं। इतने सालों में क्या किसी की नजर इस अवैध काम पर नहीं पड़ी या फिर जानबूझकर नजरें इनायत की गई।
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