मोरारी बापू को स्मृति चिंह देते डीआरआई के पदाधिकारी
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संत मोरारी बापू ने हरि अनंत हरि कथा अनंता पर श्रोताओं को विस्तार से समझाया। उन्होंने बताया कि भगवान राम का जन्म धरती से पाप खत्म करने के लिए हुआ था। उनकी जन्मस्थली अयोध्या कर्मभूमि है तो चित्रकूट प्रेम भूमि है। यहां आकर भगवान ने इंसान, राक्षस और जानवर को प्रेम करना बताया।
धर्मनगरी में चल रही श्रीराम कथा के विश्राम दिन रविवार को राष्ट्रीय रामायण मेला परिसर में मोरारी बापू ने कहा कि एक एक सद्गुरु को योग्य शिष्य की प्राप्ति महानिधि हैं और उसी तरह एक माता-पिता को अच्छा पुत्र मिलना निधि नहीं महानिधि है। जिस तरह खराब स्वास्थ्य ठीक होने में समय लगता है उसी तरह पाप खत्म करने के लिए पुण्य करने के बाद भी इंतजार करना पड़ता है।
साधु का सबसे बड़ा दान विश्व को प्रेम प्रदान करना है। उन्होंने हरि शब्द को विस्तार से समझाकर बताया कि इससे जुड़ी कथा भी अनंत ही है। उन्होंने भगवान राम के जन्म से लेकर लंका विजय और राज तिलक तक का वर्णन संगीतमय दोहा, चौपाईयाें के माध्यम से किया। इसके पूर्व मोरारी बापू ने डीआरआई के भवनों में जाकर कार्यकर्ताओं से बातचीत की।
उन्होंने कहा कि यहां की जो प्रवृत्ति है ये प्रतिष्ठा की प्रवृत्ति नहीं, निष्ठा की प्रवृत्ति है। इसमें आस्था है। इसके बाद बापू सभी साधकों से मिलकर रवाना हो गए। उधर कथा पंडाल में आयोजक अखिलेश कुमार, केके जालान, विवेक अग्रवाल, पंकज अग्रवाल, महेंद्र केशरवानी, विनोद गुप्ता और गोपी किशन अग्रवाल ने श्रोताओं को भोजन व शर्बत पिलाकर विदा किया।