चित्रकूट। सिविल जज (सीडी)/एफटीसी न्यायालय अश्विनी कुमार उपाध्याय ने आरोपी इंद्रजीत को 20 हजार रुपये के व्यक्तिगत बंधपत्र और इतनी ही राशि की जमानत पर रिहा करने का आदेश दिया है। उन्होंने यह फैसला वर्ष 2015 में हुए मारपीट के मामले में दिया।
वर्ष 2015 में इंद्रजीत पर भारतीय न्याय संहिता की धारा स्वेच्छा से चोट पहुंचाने, आपराधिक बल का प्रयोग, जान, संपत्ति को नुकसान पहुंचाने की धमकी के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई थी। इस मामले में आरोपी अधिवक्ता की ओर से न्यायालय में जमानत अर्जी डाली गई थी। कोर्ट में सुनवाई के दौरान अधिवक्ता ने तर्क दिया कि आरोपी इंद्रजीत झूठा फंसाया गया है और वह निर्दोष है। उसका कोई आपराधिक इतिहास नहीं है और वह जमानत देने को तैयार है।
वहीं, अभियोजन अधिकारी ने जमानत का विरोध करते हुए कहा कि अपराध संज्ञेय और अजमानतीय प्रकृति का है।दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने पत्रावली का अवलोकन करने में पाया कि जमानत के पर्याप्त आधार मौजूद हैं।इस मामले की परिस्थितियों को देखते हुए अदालत ने इंद्रजीत को जमानत पर रिहा करने का आदेश दिया। (संवाद)