धर्मनगरी के उद्यमिता विद्यापीठ परिसर में चल रही संत मोरारी बापू की रामकथा का दूसरा दिन ’’विश्वभरण पोषण कर जोई, ताकर नाम भरत अस होई’’ चौपाई पर केंद्रित रहा। संत मोरारी बापू ने इस चौपाई की व्याख्या करते हुए गोस्वामी तुलसीदास का संदर्भ देते हुए कहा भगवान राम के चरण कमल में जिनका मन रमा है वो भरत है।
उन्होने कहा भारत देश का एक टुकड़ा नहीं बल्कि ज्ञान में डूबा देश है। संत श्री ने भरत के चरित्र की व्याख्या करते हुए कहा जो दिनरात भक्ति में डूबा रहता है उसका नाम भरत होता है। यही भरत का भाव है। वेद की महिमा अतुलनीय है लेकिन मानस के बिना रामकथा भी अधूरी है। श्री मदभागवत गीता में भरत तो है लेकिन जड़ भरत है।
मानस में जो भरत है वो जड़ को चैतन्य और चैतन्य को जड़ बना देने वाले हैं। जो ज्ञान में रत है उसे भरत कहते है। मानस के जितने भी प्रेमी है उन सबको एक जगह इकठ्ठा कर सब के विविध प्रेम को एकत्रित करें और देखें कि वो सब एक ही जगह भरत में मिलेगें।
रामकथा के दौरान संत मोरारी बापू ने श्रद्धालुओं की जिज्ञासा का समाधान भी किया। रामकथा के पहले और अंत में मधुर भक्ति गीतों पर श्रद्धालु भावविभोर कर नाचने लगे। रामकथा के दौरान आयोजक मंडल श्रीराम कथा प्रेम यज्ञ समिति के सदस्य कृष्ण कुमार जालान, अवधेश खेमका और अखिलेश खेमका मौजूद रहे।