ओलावृष्टि, अतिवृष्टि और सूखे की मार से टूटे किसान अब फसल को अन्ना मवेशियों से बचाते परेशान हैं। हालात यह हैं कि किसान परिवार चलाने के लिए कभी सरकारी राहत तलाश रहा है तो कभी सस्ता राशन पाने के लिए लाइन में खड़ा है। यहां भी किसानों के साथ पूरा न्याय नहीं हो रहा। वहीं चारे की समस्या से भी जूझ रहे किसानों ने अपने मवेशियों को अन्ना छोड़ दिया है।
ओला गिरने व जरूरत से ज्यादा बारिश होने से पिछले वर्ष फसल पूरी तरह चौपट हो गई थी। इस बार बारिश बेहद कम होने से समय पर फसल की बुआई नहीं हो सकी। निजी सिंचाई के साधनों से जो फसल बोई गई वह अब तैयार होने को है। ऐसे में अन्ना मवेशी उन फसलों को नुकसान पहुंचा रहे हैं। किसान को दिनरात खेत की रखवाली करनी पड़ रही है। जिले में रिकार्ड के मुताबिक चार लाख से ज्यादा गो वंशीय व पौने दो लाख से अधिक महिष वंशीय पशु हैं।
सूखे के कारण ज्यादातर किसानों ने मवेशियों को अन्ना छोड़ दिया है। कुछ लोगों ने तो बाजार में बेच दिया है। मौजूदा समय में अन्ना मवेशियों से बची खेती को भारी नुकसान तो हो रहा है। जिला पशु चिकित्साधिकारी डा. एनके गहलोत ने बताया कि जिले में लगभग 15 हजार अन्ना मवेशी शहर व गांव के आस पास घूम रहे हैं।
किसान राममूरत, माताबदल, चुन्नकू प्रसाद, रामेश्वर आदि का कहना है कि अन्ना जानवर फसल को नुकसान तो पहुंचाते ही है। इसके साथ ही किसी के खेत में जब अन्ना पशु घुस जाते हैं और उसके अपने खेत से निकालने के बाद अगर वह पास के खेत में घुस जाए तो किसानों में आपसी झगड़े होने लगते है। जिससे गांवों का माहौल भी खराब है। वहीं कभी कोई किसान खेत की रखवाली करने में थोड़ी सी भी चूक कर दे तो उसकी फसल अन्ना पशु बर्बाद कर जाते हैं।