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36 घंटे में सिर्फ दो बार मिली चटनी-रोटी

Wed, 02 Aug 2017 12:12 AM IST
चित्रकूट ब्यूरो
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आरपीएफ के साथ मौजूद डकैतों के चंगुल से छूटकर आए बलवंत सिंह व विजय सिंह। - फोटो : amarujala
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कुख्यात डाकू गैंग के चंगुल से छूटकर आए दोनों अपहृतों के चेहरे पर डाकुओं का खौफ साफ नजर आ रहा था। बताया कि डाकुओं की कैद में हर पल यही लगता था कि पता नहीं कब ये उन्हें गोली मार दें। आपस में दोनों को बात नहीं करने देते थे। झाड़ियों के बीच 36 घंटे रखकर सिर्फ दो बार रोटी चटनी खिलाई। दोनों के हाथ बांधे थे और चेतावनी दी थी कि उनसे कोई सवाल मत करना। 
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रेलवे गेटमैन बलवंत बहादुर सिंह ने पत्नी दीपा सिंह, चार पुत्री, एक पुत्र, भाई राजेश सिंह और दामाद मिर्जापुर निवासी रत्नेश सिंह के सामने नम आंखों से बताया कि खाना खाते समय ही हाथ खोले गए। परिवार से फोन पर बातचीत नहीं कराई गई, लेकिन नंबर लेकर तीन बार फिरौती पहुंचाने की धमकी दी गई। इसी प्रकार सपा नेता के पुत्र विजय सिंह ने अपने परिवार के बीच बताया कि अपहरण के बाद से लेकर घर पहुंचने से पहले तक यह डर रहा कि पता नहीं कब गोली मार दी जाए।

कभी फोन आता था तो डाकू दूर जाकर बात करते थे। 
उस खौफनाक पल को याद कर बताया कि अपहरण के बाद लगभग तीन घंटे तक डाकुओं ने पैदल चलाया। एक घंटे आराम करने के बाद फिर दो घंटे तक अंधेरे में चलते रहे। जिस स्थान पर उन्हें रखा गया था, वहां दिन में भी सूर्य की किरणें दिखाई नहीं पड़ती थीं। हर पल भगवान से सकुशल घर पहुंचाने की प्रार्थना करते थे। उनके पास दो डाकू असलहे लेकर तैनात रहते थे। 
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फिरौती के लिए दिए दो लाख 
रेलवे गेटमैन के भाई इलाहाबाद निवासी राजेश सिंह व दामाद मिर्जापुर निवासी रत्नेश ने साफ शब्दों में कहा कि उन्होंने डकैतों को दो लाख रुपये पहुंचाने के लिए एक मध्यस्थ को दिए हैं। उनसे पहले पांच लाख की मांग हुई थी। आरोप लगाया कि कुछ पुलिस कर्मियों ने भी उनसे कहा कि पहले फिरौती देकर अपने परिवार के सदस्य को बचा लो, इसके बाद पुलिस अगली कार्रवाई करेगी। उधर, सपा नेता संतू सिंह ने फिरौती पहुंचाने के मामले में चुप्पी साधी। कुछ देर बाद कहा कि पुलिस के प्रयास से सफलता मिली। अपर एसपी बलवंत चौधरी ने कहा कि फिरौती पहुंचाने की जानकारी नहीं है। एसपी प्रताप गोपेंद्र ने बताया कि पुलिस के दबाव और घर के लोगों द्वारा किए गए सामाजिक प्रयास से दोनों छूटे हैं।
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