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प्रयोग सफल हुआ तो देश के अन्य हिस्सों में बनेगी सड़क

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पहाड़ी के औदहा गांव में निर्माणाधीन सड़क का निरीक्षण करते भारत सरकार के ग्रामीण विकास मंत्रालय ? - फोटो : CHITRAKOOT
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चित्रकूट। पहाड़ी से सुरेसन गांव तक प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के अंतर्गत एफडीआर तकनीक से बनाई जा रही रोड़ का रविवार को ग्रामीण विकास मंत्रालय भारत सरकार के सचिव एनएन सिन्हा व अपर सचिव डा. आशीष कुमार गोयल, अपर मुख्य सचिव ग्राम्य विकास उत्तर प्रदेश शासन मनोज कुमार सिंह, मुख्य कार्यपालक अधिकारी यूपीडीआरआरडीए भानु चंद्र गोस्वामी ने निरीक्षण किया। टीम ने अपने सामने रोड़ का निर्माण कार्य कराकर तकनीकी देखी। कहा कि यह रोड कम से कम पांच साल से अधिक समय तक चलेगी।
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फुल डेप्थ रिक्लेमेशन (एफडीआर) तकनीक वाली सड़क का निरीक्षण भारत सरकार की टीम ने रविवार की शाम को औदहा गांव के पास किया। उन्होंने बताया कि निर्माण के वक्त पुरानी सड़क का मैटेरियल बराबर करने के बाद उसमें सीमेंट डाली जाती है, फिर केमिकल डाला जाता है।
इसके बाद चार सेंटीमीटर डामर डालते हैं। कहा कि सीमेंट महंगी पडे़गी या केमिकल तो पता चला कि केमिकल महंगा पड़ता है लेकिन केमिकल डालने से सड़क मजबूत होगी। इसके बाद अधिकारियों अपने सामने आधुनिक मशीनों के माध्यम से सड़क का निर्माण कार्य देखा।
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करीब एक घंटे से अधिक निर्माण कार्य चलता रहा। इस दौरान निदेशक एनआरआई डीएम डा आशिक पटेरिया, उपनिदेशक राकेश कुमार, अधीक्षण अभियंता सुरेश चंद्र, प्रयागराज के अधीक्षण अभियंता हरेंद्र कुमार, अधिशाषी अभियंता रिजवान शब्बीर, जेई जितेंद्र कुमार आदि मौजूद रहे।
सड़क पांच साल से अधिक चलेगी
चित्रकूट। ग्रामीण विकास मंत्रालय भारत सरकार के सचिव एनएन सिन्हा ने पत्रकारों से हुई बातचीत में कहा कि नई तकनीकी पर आधारित मार्गों के निर्माण की गुणवत्ता सुनिश्चित किए जाने के लिए एक पीएमयू का गठन किया गया है। जिसमेें जापान की तकनीक के सहयोग से निर्माण किया गया है। इसमें रिसाइकिलर, आटोमेटिक मशीनों के माध्यम से नीदरलैंड से मंगाए गए केमिकल का उपयोग किया जाता है। बताया कि पांच साल से यह अधिक समय तक चलेगी। इस तकनीकी से मार्गों के निर्माण में बहुत कम समय लगता है। दो दिन में एक किमी सड़क का निर्माण किया जा सकता है।
नर्माण इकाई के अधिकारियों को फटकारा
चित्रकूट। सड़क निर्माण को लेकर कई जगह अनियमितता और खराब सामग्री के प्रयोग की अमर उजाला में लगातार खबरों को जांच अधिकारियों ने संज्ञान में लिया। ग्रामीण अभियंत्रण सेवाएं विभाग के इंजीनियरों को बुलाकर फटकारा कि आखिर मानक विहीन सड़क क्यों बन रही है। जिस पर कुछ इंजीनियरों ने कहा कि अब इसमें सुधार करा दिया गया है। निरीक्षण के दौरान ही कुछ ग्रामीणों ने अनियमितता की शिकायत जांच टीम से की। जिस पर जांच टीम के अधिकारियों का गुस्सा बढ़ गया। इस मौकेे पर योगेंद्र सिंह व तेज चतुर्वेदी आदि ग्रामीण मौजूद रहे।
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