चित्रकूट। गर्भवती की दहेज के लिए हत्या में दोष सिद्ध होने पर न्यायालय ने मृतका के सास, ससुर और पति को 14-14 वर्ष सश्रम कारावास की सजा सुनाई है। साथ ही मृतका की ननद को भी 12 वर्ष सश्रम कारावास की सजा सुनाई है।
मऊ क्षेत्र के ताड़ी गांव के निवासी ज्ञानचंद्र ने बताया कि उसने अपनी बेटी गीता की शादी छह मई 2019 को शिवपुर गांव के निवासी हनुमान के साथ की थी। शादी के बाद से ही ससुराल वाले उसकी बेटी से दहेज में एक लाख रुपये और लाने की मांग करने लगे। साथ ही मांग को लेकर उसके साथ मारपीट करने लगे। इसके चलते वह गीता को अपने गांव ताड़ी ले आया। ससुराल उसे आकर दोबारा उत्पीड़न न करने का वादा करके वापस ले गए।
इसके बाद 23 मई 2020 की शाम चार बजे गीता ने बताया कि उसे बहुत मारा है। इसकी सूचना मिलने पर वह मौके पर गया। जहां चिकित्सक ने बताया कि गंभीर हालत के चलते गीता को प्रयागराज रेफर कर दिया गया है। वहां जाने पर गीता ने उसे बताया कि ससुराल ने उस पर मिट्टी का तेज डालकर उसे जलाया था। इलाज के दौरान उसकी गर्भवती बेटी का गर्भपात हो गया और 30 मई 2020 को उसकी मौत हो गई।
पुलिस ने मामले की रिपोर्ट दर्ज करने के बाद आरोपियों को गिरफ्तार करते हुए न्यायालय में आरोप पत्र दाखिल किया था। बचाव और अभियोजन पक्ष के अधिवक्ताओं की दलीलें सुनने के बाद गुरुवार को त्वरित न्यायालय के अपर सत्र न्यायाधीश नीरज श्रीवास्तव ने गीता के पति हनुमान, ससुर गंगा उर्फ गंगादीन व सास रामदुलारी को 14-14 वर्ष के सश्रम कारावास की सजा सुनाई गई। ननद गुड़िया को 12 वर्ष सश्रम कारावास की सजा सुनाई गई। साथ ही प्रत्येक आरोपी को 12- 12 हजार रुपये अर्थदंडकी भी सजा सुनाई है।
मऊ। थाना क्षेत्र के माधव पुरवा लालता रोड निवासी शारदा प्रसाद ने बताया कि उसके पिता गरीब दास 22 जनवरी की देर शाम चौराहा से घर आ रहे थे। तभी सामने से आई बाइक ने टक्कर मार दिया था। जिससे पिता घायल हो गए। पिता की इलाज के दौरान बुधवार की रात को मौत हो गई। उसकी तहरीर पर पुलिस ने बाइक चालक के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया है।