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Chitrakoot News: धर्मनगरी की तंग गलियों में चलते होटल-कोचिंग, बेसमेंट में लाइब्रेरी

Wed, 24 Jun 2026 12:42 AM IST
कानपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, चित्रकूट
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चित्रकूट। धर्मनगरी चित्रकूट की सकरी और तंग गलियों में ऐसे ही कोचिंग सेंटर चल रहे हैं जो अग्नि सुरक्षा के मानक पूरा नहीं करते हैं। मंगलवार को संवाद न्यूज एजेंसी की टीम ने शहर में संचालित कोचिंग सेंटरों की पड़ताल की तो चौंकाने वाले दृश्य सामने आए। यहां पर एक तंग गलियों में कोचिंग सेंटर चलते मिले। एक ही द्वार व सीढ़ी के जरिए बच्चों का कोचिंग सेंटर आ जा रहे थे। कई संस्थानों में आग से बचाव के लिए जरूरी उपकरण तक नहीं हैं जबकि कुछ स्थानों पर बेसमेंट में कार्यक्रम और शैक्षणिक गतिविधियां संचालित हो रही हैं। अगर इन सेंटरों में कोई अनहोनी वारदात हो जाए तो राजधानी जैसा भयावह हादसा हो सकता है।
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बेसमेंट में चल रही लाइब्रेरी, एक ही निकास का सहारा
जिला मुख्यालय स्थित धनुष चौराहे के पास बेसमेंट में एक लाइब्रेरी संचालित हो रही है। यहां एक समय में 50 से अधिक विद्यार्थी अध्ययन करते हैं लेकिन सुरक्षा के नाम पर केवल एक निकास द्वार है। आपात स्थिति में इतनी संख्या में लोगों का सुरक्षित बाहर निकलना मुश्किल हो सकता है। अग्निशमन विभाग के अधिकारियों के अनुसार लाइब्रेरी संचालक को दो बार नोटिस दी जा चुकी है। जल्द ही कार्रवाई की जाएगी।
संकरी गली में कोचिंग, फायर सिस्टम न इमरजेंसी रास्ता
खोही परिक्रमा मार्ग की एक संकरी गली में संचालित कोचिंग सेंटर में भी सुरक्षा मानकों की अनदेखी देखने को मिली। कोचिंग के बगल में होटल भी संचालित है। यहां प्रतिदिन 30 से 40 छात्र पढ़ने आते हैं लेकिन आग से बचाव के लिए कोई विशेष व्यवस्था नहीं है। कोचिंग में न तो अग्निशमन उपकरण लगाए गए हैं और न ही आपातकालीन निकास द्वार की व्यवस्था है। गली संकरी होने के कारण आग लगने की स्थिति में राहत और बचाव कार्य भी प्रभावित हो सकता है।
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रामघाट के पास होटल में एक ही रास्ता
रामघाट क्षेत्र में स्थित एक होटल एकमात्र प्रवेश एवं निकास द्वार के सहारे संचालित मिला। होटल में 10 से अधिक कमरे हैं लेकिन आग बुझाने के लिए कोई प्रभावी व्यवस्था नजर नहीं आई। लोगों का कहना है कि त्योहारों और धार्मिक आयोजनों के दौरान यहां बड़ी संख्या में श्रद्धालु आते हैं। ऐसे में हादसा भयावह हो सकता है।
यह होने चाहिए अग्नि सुरक्षा के इंतजाम
विशेषज्ञों के मुताबिक होटल, रेस्टोरेंट, कोचिंग सेंटर और अन्य व्यावसायिक संस्थानों में फायर अग्निशामक यंत्र, फायर अलार्म सिस्टम, स्मोक डिटेक्टर, फायर हाइड्रेंट, स्प्रिंकलर सिस्टम, आपातकालीन निकास द्वार, इमरजेंसी लाइटिंग,फायर होज रील,स्पष्ट निकासी मार्ग संकेतक अनिवार्य है।
हादसे के बाद नोटिस थमा करते खानापूर्ति
देश के विभिन्न शहरों में होटल और व्यावसायिक भवनों में आग लगने की हालिया घटनाओं के बाद भी जिम्मेदार सबक नहीं रहे हैं। उन्हें अपनी कर्तव्यों की याद तब आती है, जब कोई हादसा होता है। फौरीतौर पर चेकिंग के नाम पर नोटिसें थमा कर इतिश्री कर लेते हैं। शहर व कस्बों की संकरी गलियों में संचालित होटल, रेस्टोरेंट, बैंक्वेट हॉल और कोचिंग सेंटर बिना पर्याप्त सुरक्षा इंतजामों के चल रहे हैं। अग्निशमन विभाग के आंकड़ों के अनुसार जिले में करीब 50 संस्थानों ने एनओसी ले रखी है। वहीं जिले में पंजीकृत 10 कोचिंग सेंटरों में एक के पास भी फायर एनओसी नहीं है। अधिकारियों का कहना है कि कई संचालक महंगे सुरक्षा उपकरण लगाने से बच रहे हैं।
जिम्मेदार बोले
संस्थानों की नियमित जांच की जा रही है। नियमों का पालन नहीं करने वालों को नोटिस दी जा रही है। उच्चाधिकारियों से निर्देश मिलने पर व्यापक जांच अभियान चलाया जाएगा। नियमों का उल्लंघन पाए जाने पर नियमानुसार कार्रवाई होगी।- पवन कुमार त्यागी, प्रभारी अग्निशमन
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