चित्रकूट। मंदाकिनी नदी में आई बाढ़ से शहर का तरौंहा मोहल्ला सबसे अधिक प्रभावित हुआ है। बाढ़ और बारिश से चार-पांच कच्चे घर गिर गए, कुछ घरों की दीवारें ढह गईं।
हालात यह हैं कि बाढ़ के तीसरे दिन भी लोग कीचड़ में फंसी बची-कुची गृहस्थी समेटते नजर आए। आंखों में आंसू भरे कई लोगों ने कहा कि अब उनके पास गृहस्थी नहीं बची है। खाने-पीने को भी कुछ नहीं है। क्षेत्र के लगभग 250 कच्चे-पक्के मकान पानी की चपेट में हैं। पक्के मकान तो एक मंजिल तक डूबने से अब कीचड़ से सन गए हैं।
तरौंहा मोहल्ला मंदाकिनी नदी किनारे बसा है, जहां अभी भी हालात नहीं सुधरे हैं। सड़कों पर कीचड़ जमा होने से निकलना मुश्किल हो गया है। पाइप लाइन से जलापूर्ति बंद होने से लोग सड़क किनारे खड़े टैंकर और हैंडपंप के सहारे पानी भरने को मजबूर हैं। जय देव अखाड़ा के पास बस्ती के निवासी संतोष कुमार, राजू कुशवाहा ने बताया कि बाढ़ के कारण गृहस्थी लेकर दूसरी जगह चले गए थे, लौटे तो कच्चा मकान गिरा मिला, बचा-कुचा सामान बर्बाद हो गया। अब खाने-पीने के भी लाले हैं।
क्योटरा के हनुमत लाल ने भी मकान गिरने की बात कही। वहीं साबुद्दीन, कादिर खान और मूलचंद्र ने बताया कि उनके दो मंजिला मकानों में पानी घुस गया था, जिससे पूरी गृहस्थी खराब हो गई। पानी की सप्लाई बंद होने से टैंकर और हैंडपंप ही सहारा हैं।
फोटो 31 सीकेटीपी 23 संतोष का गिरा कच्चा घर। संवाद
फोटो 31 सीकेटीपी 23 संतोष का गिरा कच्चा घर। संवाद
फोटो 31 सीकेटीपी 23 संतोष का गिरा कच्चा घर। संवाद
फोटो 31 सीकेटीपी 23 संतोष का गिरा कच्चा घर। संवाद