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बच्चों के दोस्त बनकर मदद करें अभिभावक

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चित्रकूट। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस पर जिला अस्पताल में आओ मिलकर आत्महत्या को रोके विषय पर संगोष्ठी आयोजित की गई। जिसमें जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की सचिव व सिविल जज नम्रता शर्मा ने मानसिक रोगियों से संबंधित कानूनी प्रावधानों की जानकारी दी। मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ विनोद कुमार यादव ने कहा कि अभिभावक अपने बच्चों के माता-पिता नहीं बल्कि दोस्त बनकर उनकी समस्याओं को सुने। उनकी प्रत्येक बात का वाजिब जवाब देने का प्रयास करें। यदि किसी अभिभावक को उनके बच्चों में चिड़चिड़ापन सहित असमान लक्षण दिखे तो ऐसे बच्चों को जिला अस्पताल में लाकर कर मानसिक रोग का इलाज कराएं यह पूरी तरह से ठीक हो जाता है।
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बृहस्पतिवार को जिला विधिक सेवा प्राधिकरण और स्वास्थ्य विभाग के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित कार्यक्रम में मुख्य चिकित्सा अधीक्षक डॉ आरके गुप्ता ने कहा कि मानसिक रोग के रोगियों को ठीक कराने के लिए झाड़-फूंक के चक्कर में बिल्कुलना पड़े। किसी व्यक्ति पर अनावश्यक मानसिक दबाव न बनाया जाए। यह भी मानसिक रोग का एक कारण हो सकता है। इस मौके पर नोडल अधिकारी डॉ. एबी कटियार, डॉ. रामरतन, डॉ पीडी चौधरी, डॉ एमसी वर्मा, डॉ एके सिंह व जिला कार्यक्त्रस्म प्रबंधक आरके करवरिया मौजूद रहे।
छह माह में 3376 मामले आए
चित्रकूट। जिला अस्पताल में मानसिक रोग विशेषज्ञ डॉ नरेंद्र देव पटेल ने बताया कि अप्रैल 2019 से सितंबर 2019 तक कुल 3376 मामले आए हैं। इनमें से सामान्य मामले 3232 हैं। जबकि आत्महत्या के विचार आने वाले मामले 38, सिजोफ्रेनिया (अकेले में बड़बड़ाना, हंसना, बाहर का कचरा उठाकर घर में ले आना, कान में आवाज आना एहसास होना कि उसके आसपास कोई है, कोई दिखाई देता रहता) के 106 मामले आ चुके हैं।
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