चित्रकूट। जिले में शनिवार को राष्ट्रीय लोक अदालत आम लोगों के लिए राहत और रोचक किस्सों से भरी रही। किसी का लाखों का कर्ज हजारों में निपट गया तो कोई बिजली के बिल से परेशान होकर चक्कर काटता रहा।
सबसे रोचक मामला कर्वी का रहा। यहां के शिवेंद्र प्रताप सिंह ने एसबीआई से किसान क्रेडिट कार्ड पर करीब पांच लाख रुपये का लोन लिया था। किस्त जमा न होने पर ब्याज जुड़ते-जुड़ते यह रकम सात लाख हो गई और बैंक ने 2020 में खाता एनपीए घोषित कर दिया। 2021 में शिवेंद्र की मौत के बाद परिवार पर नोटिस का दबाव था। उनके भाई बृजेंद्र सिंह लोक अदालत पहुंचे और बैंक से समझौता कर महज दो लाख रुपये में पूरा खाता बंद करा दिया। बृजेंद्र ने कहा अब नोटिस से छुटकारा मिल गया।
इसी तरह कर्वी की गीता देवी ने भी केसीसी पर एक लाख का लोन लिया था। भुगतान न होने से यह बढ़कर 1.61 लाख हो गया। बैंक के नोटिस के बाद खाता एनपीए में चला गया। लोक अदालत में उन्होंने 43 हजार रुपये जमा कर खाता बंद करा लिया और चैन की सांस ली।
उसरा पुरवा निवासी अमर सिंह ने बताया कि उनकी दादी सुरजी देवी के नाम बिजली कनेक्शन है। घर में एक पंखा और एक बल्ब जलता है, फिर भी 9179 रुपये का बिल आ गया। मानिकपुर के शिव नगर निवासी छेदीलाल ने बताया कि वह हर महीने बिल जमा करते हैं, फिर भी 16 हजार रुपये का बिल भेज दिया गया। लोक अदालत में विद्युत विभाग का शिविर न लगने से कई उपभोक्ताओं का निस्तारण नहीं हो सका और उन्हें निराश लौटना पड़ा।
जिला न्यायालय परिसर में शनिवार को राष्ट्रीय लोक अदालत में 1,18,739 वाद निपटाए गए और 29,34,80,818 रुपये की वसूली हुई। जिला न्यायाधीश शेषमणि शुक्ला ने अदालत का शुभारंभ किया। कई वर्षों से फंसे एनपीए खाते आधे से कम राशि में निपटे। एसबीआई की 6 शाखाओं के 73 एनपीए खातों में 1.31 करोड़ रुपये बकाया था, जिसमें 70.64 लाख रुपये में समझौता हुआ।