गायत्री तीर्थ शांतिकुंज के तत्वाधान एवं महिला मंडल गायत्री परिवार शाखा
कर्वी के संयोजन में प्रज्ञा पुराण कथा के चौथे दिन दीपों से कथास्थल जगमगा
गया। कथावाचक आचार्य भृगु ने कहा कि गृहस्थ जीवन सबसे बड़ी योग साधना है।
यह सबसे बड़ा आश्रम है।
उन्होंने कहा कि गृहस्थ जीवन में भी
योगसाधना में वर्णित दुर्लभ सिद्धियां प्राप्त की जा सकती हैं। वशिष्ठ,
अत्रि, याज्ञवल्क्य, रामकृष्ण परमहंस, कबीर, पं. श्रीराम शर्मा आचार्य आदि
ने गृहस्थ होते हुए भी कई योग साधनाओं की दुर्लभ सिद्धि हासिल की थी।
पं.
रामनारायण त्रिपाठी ने मां की महानता वर्णित की। उन्होंने कहा कि नारी
करुणा की प्रतिमूर्ति है, नारी की करुणा संवेदना, मातृत्व से सभी
संस्कारवान बने हैं। इस मौके पर कुं. भालेंदु सिंह, डा. मार्तंड सिंह,
बाबूलाल सिंह, बाला प्रसाद, श्रवण गुप्ता, विमला सिंह, सुधा तिवारी, उमा,
सविता तिवारी मौजूद रहीं।
उधर, चित्रगुप्त मंदिर पुरानी बाजार
कर्वी में चल रही सात दिवसीय भागवत कथा का समापन हो गया। इस अवसर पर हवन
पूजन और भंडारा किया गया। इसमें कथावाचक पं. उमाकांत शास्त्री ने विधिविधान
से पूजा कराई। पूर्व अधिशासी अधिकारी रमाशंकर, सीमा निगम, हेमला
श्रीवास्तव, शर्मिला श्रीवास्तव, चंद्रप्रकाश खरे मौजूद रहे।