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Chitrakoot News: कोषागार घोटाले में गौरेंद्र शिवहरे को अतिरिक्त धारा में जमानत

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= घोटाले में बिचौलिया शिवहरे के खाते में अनियमित करोड़ों की धनराशि स्थानांतरित हुई थी
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संवाद न्यूज एजेंसी
चित्रकूट। सत्र न्यायाधीश शेषमणि ने कोषागार घोटाले में नामजद बिचौलिया गौरेंद्र शिवहरे की जमानत याचिका स्वीकार कर ली है। उन्हें यह जमानत सबूत छिपाने के आरोप में जोड़ी गई अतिरिक्त धारा के तहत मिली है। उच्च न्यायालय से शिवहरे को पहले ही गंभीर धाराओं में जमानत मिल चुकी थी।
जिला शासकीय अधिवक्ता श्याम सुंदर मिश्रा ने बताया कि अक्तूबर 2025 में हुए कोषागार घोटाले में बिचौलिया गौरेंद्र शिवहरे के खाते में अनियमित करोड़ों की धनराशि स्थानांतरित हुई थी। आरोपी वर्तमान में जेल में निरुद्ध है। जांच के दौरान भारतीय न्याय संहिता की धारा 238 (पुरानी धारा 201 भारतीय दंड संहिता) जोड़ी गई थी। यह धारा जमानती है। आरोपी के अधिवक्ता शिवचंद्र सिंह ने कोर्ट में जमानत अर्जी दाखिल की थी। सुनवाई में बताया कि उच्च न्यायालय ने गौरेंद्र शिवहरे को पहले ही कई गंभीर धाराओं में जमानत मिल चुकी है। सत्र न्यायालय ने रिकॉर्ड का अवलोकन किया। न्यायालय ने पाया कि धारा 238 बीएनएस (पुरानी धारा 201 आईपीसी) एक जमानती अपराध है। यह धारा जांच के बाद जोड़ी गई थी। इसलिए, आरोपी इस अतिरिक्त धारा में भी जमानत का हकदार है।
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अवैध हथियार रखने के दोषी को तीन साल कारावास
चित्रकूट। विशेष न्यायाधीश राम मणि पाठक ने अवैध हथियार रखने में आरोपी को तीन साल के कारावास की सजा सुनाई है। उस पर एक हजार रुपये का जुर्माना लगाया। यह मामला मानिकपुर थाना क्षेत्र से जुड़ा है।
पुलिस के अनुसार, 15 मई 2016 को उपनिरीक्षक संजय मिश्र अपनी टीम के साथ गिदुरहा गांव में वांछित बदमाशों की तलाश कर रहे थे। हनुमान चौक मंदिर के पास झाड़ियों में हलचल सुनाई दी। वहां तीन व्यक्ति हथियारों के साथ दिखे। एक बदमाश ने पुलिस को देखकर चिल्लाया। तीनों ने जान से मारने की नीयत से पुलिस पर फायरिंग कर दी थी। पुलिस ने पीछा कर बरदानी कोल को करीब 150 कदम दूर से पकड़ा था। उसके पास से एक देसी बंदूक और तीन जिंदा कारतूस बरामद हुए। बंदूक की चैंबर में एक खाली कारतूस भी मिला। बरदानी कोल हथियार का लाइसेंस नहीं दिखा सका। इस मामले में वरदानी कोल के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की थी। विवेचक ने विवेचना कर आरोप पत्र न्यायालय में प्रेषित किया था। सुनवाई में आरोपी बरदानी कोल खुद को गरीब और असहाय बताया और मुकदमा लड़ने से असमर्थ बताते हुए स्वेच्छा से अपना जुर्म कबूल किया। उसने जेल में बिताई अवधि को सजा में समायोजित करने का अनुरोध किया था। पक्ष व विपक्ष की दलीलें सुनने के बाद न्यायाधीश ने आरोपी को तीन साल की सजा दी। (संवाद)

आरोपी को 50 हजार रुपये के बंधपत्र पर जमानत मिली
चित्रकूट। सत्र न्यायाधीश शेष मणि ने मारपीट के मामले में आरोपी भगवानदास जोशी की द्वितीय जमानत याचिका स्वीकार कर ली है। उन्हें 50,000 रुपये के व्यक्तिगत बंधपत्र और एक जमानत पर रिहा करने का आदेश दिया गया है। जोशी पर घर में घुसकर मारपीट और जान से मारने की धमकी देने का आरोप था।
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यह मामला कर्वी थाना क्षेत्र से संबंधित है। वादी रानू ने प्राथमिकी दर्ज कराई थी, जिसमें आरोप लगाया था कि भगवानदास और दो अन्य उसके घर में घुस आए थे। उन्होंने लाठी-डंडों से मारपीट की, जिससे उसका सिर फट गया। तहरीर पर पुलिस ने प्राथमिकी दर्ज की थी। इस मामले में आरोपी के अधिवक्ता ने जमानत अर्जी डाली थी। सुनवाई में आरोपी अधिवक्ता ने निर्दोष बताया और उसे झूठा फंसाया गया है। अभियोजन पक्ष ने जमानत का विरोध किया। अदालत ने दोनों पक्षों के तर्कों और केस डायरी का अवलोकन किया। सभी तथ्यों और चोटों की प्रकृति को देखते हुए अदालत ने जमानत का पर्याप्त आधार पाया और उसकी जमानत याचिका मंजूर कर ली। (संवाद)
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