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जान खतरे में नहीं डालना चाहते वन कर्मी!

Mon, 06 Apr 2015 12:02 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला,चित्रकूट
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 बलखड़िया गिरोह द्वारा मारपीट की घटना के बाद वन कर्मियों के बयान से ऐसा लगता है कि वे बेवजह जान खतरे में डालना नहीं चाहते। तभी अभी तक मामले में कोई रिपोर्ट दर्ज नहीं कराई गई। उनका कहना है कि  उन्हें वन में ही काम करना है। ऐसे में पंगा कौन मोल ले।
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शुक्रवार को बहिलपुरवा थाना क्षेत्र में दस्यु सरगना बलखड़िया गिरोह ने वन क्षेत्राधिकारी और फारेस्ट गार्ड सहित पांच वनकर्मियों को लाठियों से पीटा था। मारकुंडी वन क्षेत्राधिकारी जीपी शुक्ला शुक्रवार दोपहर फारेस्ट गार्ड रामऔतार और तीन वाचरों के साथ रुखमा बीट में लगी नर्सरी का मुआयना कर रहे थे कि तभी बलखड़िया साथियों सहित वहां आ धमका था और उनकी जमकर पिटाई की थी। इसमें फारेस्ट गार्ड को काफी चोटें आई हैं और उसका इलाज मारकुंडी में ही एक निजी अस्पताल में किया जा रहा है।

उधर, बहिलपुरवा थानाध्यक्ष शिवबचन सिंह को इसकी जानकारी नहीं थी। इस संबंध में रेंजर जीपी शुक्ला ने कहा भी था कि उन्होंने पुलिस को सूचना ही नहीं दी है। गौरतलब है कि इस तरह के मामले वनकर्मियों के साथ अक्सर पेश आते हैं पर ये लोग इनको छिपा ले जाते हैं। एक विभागीय अधिकारी ने नाम छिपाते हुए बताया कि इसके पीछे वनकर्मियों की सुरक्षा का मुद्दा अहम होता है।
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वनकर्मियों का कार्यक्षेत्र ही वन होता है और ऐसे में दस्यु गिरोह के सदस्यों से आमना सामना आम बात होती है। अगर रोज रोज इनकी शिकायत की जाए तो तय है कि ये खुन्नस खाकर और ज्यादा हानि पहुंचाएंगे। खासतौर पर मानिकपुर के पाठा इलाके में तो दस्युओं का अक्सर आना जाना रहता ही है। उधर, शुक्रवार की घटना को लेकर जब एसपी पवन कुमार से बात की गई तो उन्होंने भी बताया कि किसी ने कोई रिपोर्ट दर्ज नहीं कराई है। उन्होंने गांव के आसपास पुलिस को भेजकर कांबिंग कराई है।
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