फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

वनवासियों ने वन क्षेत्र की जमीन पर मांगा अधिकार

Sat, 15 Jul 2017 11:24 PM IST
चित्रकूट
विज्ञापन
villo tree
विज्ञापन
अमर उजाला ब्यूरो
विज्ञापन

चित्रकूट। पाठा क्षेत्र के वनवासियों ने जंगल की जमीन पर अधिकार दिलाने की मांग फिर तेजी से उठाई है। इनका मानना है कि कई साल पहले सरकार ने कानून भी बनाया है लेकिन वन विभाग के अधिकारी इसे लागूू नहीं कर रहे।
अखिल भारतीय वन जन श्रमजीवी यूनियन के कार्यकर्ताओं ने जिले में वनाधिकार कानून के क्रियान्वयन न होने पर शनिवार को कलक्ट्रेट परिसर मेें प्रदर्शन किया। आरोप लगाया कि उनकी खेती की जमीन पर वनविभाग पौधरोपण कर रहा है। विरोध करने पर जेल भेजने की धमकी दी जाती है। जिलाधिकारी को दिए पत्र में बताया कि सरकार ने वन अधिकारों के तहत 2006 में कानून बनाया जिसको 31 जनवरी 2008 को लागू किया। इसके तहत जंगल के आस-पास रहने वाले आदिवासियों के लिए 30 ग्राम पंचायतों में वनाधिकार समितियों का गठन किया गया लेकिन इनको अधिकारों से वंचित रखा जाता है। अब उनके  खेतों में जबरन पेड़ लगाए जा रहे हैं। आदिवासियों की तीन हजार हेक्टेयर भूमि में वन विभाग ने कब्जा कर लिया है। जिसमें पौधरोपण किया जा रहा है। जबकि इस जमीन में वह पौधरोपण करने के लिए वनविभाग के अधिकारियों से फलदार वृक्ष मांग रहे है लेकिन उन्हें कांटेदार वृक्ष ही दिए जा रहे हैं। इस मौके पर अखिल भारतीय वन जन श्रमजीवी यूनियन के प्रदेश महासचिव मातादयाल, भोला प्रसाद, राममिलन, श्यामसुंदर, राजबहादुर, मुन्नी, रमरतिया, सखिया, सुनीता, ममता, चुनकी, किरन, गोलकी, भोंडी,पुनिया, रामरती, सुलेखादेवी आदि मौजूद रहीं। जिलाधिकारी शिवाकांत द्विवेदी ने नियमानुसार कार्रवाई कराने का आश्वासन दिया है।
विज्ञापन
विज्ञापन

वनकर्मी डकैतों का दिखाते लेटरपैड
मुख्यालय प्रदर्शन करने आए वनवासियों ने वन विभाग के अधिकारियों पर डकैतों के नाम पर डराने का आरोप लगाया है। ग्रामीणोेें ने बताया कि जब भी वन विभाग की मनमानी का विरोध करते हैं तो कुछ कर्मचारियों ने डाकू बबुली कोल गैंग के नाम का लेटरपैड देकर धमकाया कि यहां खेती करोगे तो जान से मार दिया जाएगा। जिससे ग्रामीणों में दहशत भी रहती है। आरोप लगाने वालेे किंहुनिया गांव के ग्रामीणों ने बताया कि वन विभाग के ऐसे अधिकारी कर्मचारी पर भी कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए। इस मामले में डीएफओ ललित गिरी ने बताया कि ऐसी कोई जानकारी नहीं है।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें