मप्र सीमा के पास स्थित लोहिया समग्र गांव कटैया डांडी के बाशिंदे सोमवार का दिन शायद ही कभी भूल पाएं। ओलावृष्टि और बारिश से खेत में पड़ी उनकी लाखों की फसल पास के बंधान में बहती रही और वे असहाय देखते रहे। खेत जलमग्न हो गए और गेहूं के लाक गीले हो गए।
लोहिया समग्र गांव कटैया डांडी के बालमुकुंद, राजकुमार, सरदार, उमेश, भइयालाल, पल्टू, प्रद्युम्न सिंह, देवकुमार, दुर्वासा, ननकू, प्रेमनारायण, धर्मपाल आदि किसान मंगलवार को खेत में मायूस खड़े दिखे। इन लोगों ने बताया कि सोमवार शाम हुई मूसलाधार बारिश से उनकी खेतों में पड़ी हजारों बीघे गेहूं की लाक बह गई।
बदहवास किसान खेत के पास बंधान से गीली और बर्बाद फसल निकालने की जुगत कर रहे थे। उन्होंने कहा कि अब तो वो लोग दाने-दाने को मोहताज हों जाएंगे। प्रेमनारायण ने बताया कि उसकी तीन बीघे का गेहूं बह गया। डेढ़ बीघे की अलसी बह गई। अन्य किसानों का भी यही हाल है।
जानवरों के भूसे की चिंता भी उन्हें सता रही है। प्रेमचंद्र, बृजेश कुमार, राजबहोर, शिवकली, मालती आदि ने बताया कि प्रकृति के प्रकोप ने उनका सब छीन लिया। उधर राजापुर के बेराउर, रामपुर, महुवागांव और उत्तमपुर में सोमवार को हुई ओलावृष्टि से खेत-खलिहान में पड़ी फसल बर्बाद हो गई। बेराउर के लाल बहादुर सिंह, रणविजय सिंह, सत्येंद्र पांडे, हरिश्चंद्र, शिवचरण, रामलाल निषाद ने बताया कि पिछले दिनों ओलावृष्टि और अतिवृष्टि के बाद जो थोड़ा बहुत गेहूं बचा था, उस पर भी भगवान ने पानी फेर दिया। गेहूं के लाक बर्बाद हो गए। अब तो इसके भी सड़ने की आशंका है।