चित्रकूट। पत्नी पर शक के चलते विवाद के बाद मासूम बेटे की कुल्हाड़ी से गला काटकर हत्या करने में सत्र न्यायालय ने पिता को उम्रकैद की सजा सुनाई है। कोर्ट ने उस पर 12 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है।
मऊ थाना क्षेत्र के दुबारी निवासी नत्थू ने 28 अक्तूबर 2024 को पुलिस को सूचना दी थी कि उसके बेटे राजकुमार निषाद उर्फ भीमसेन का पत्नी शिवकुमारी पर शक को लेकर अक्सर विवाद होता था। 27 अक्तूबर को भी इसी बात को लेकर भोर करीब तीन बजे विवाद हुआ था। जिसके बाद बच्चे अनुज, कोमल और कुंती को शिवकुमारी ने कमरे के बाहर निकाल लिया था लेकिन सबसे छोटा बेटा सत्यम (5) कमरे में ही सोता रह गया था।
विवाद बढ़ा तो सत्यम की नींद खुली और वह रोने लगा था। इस पर राजकुमार ने पत्नी को कमरे के बाहर कर दिया और अंदर से दरवाजा बंद कर लिया था। पत्नी व अन्य परिजन बाहर से दरवाजा खोलने की गुहार लगाते रहे लेकिन दरवाजा नहीं खोला। इस दौरान कुल्हाड़ी से बेटे की गर्दन धड़ से अलग कर दी, फिर सिर को घड़े में डाल दिया था। इसके बाद घर में आग लगा दी थी।
पड़ोसियों के जुटने पर आरोपी पिता मौके से भाग चुका था। नत्थू की सूचना पर तत्कालीन प्रभारी निरीक्षक मऊ विनोद कुमार राय ने आरोपी राजकुमार को गांव के बाहर गिरफ्तार कर जेल भेजा था। इसके बाद नौ नवंबर को न्यायालय में आरोप पत्र दाखिल किया था। सोमवार को दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद न्यायालय ने आरोपी को दोषी करार दिया था। बुधवार को सत्र न्यायाधीश शेषमणि शुक्ला ने पिता को उम्रकैद की सजा सुनाई।
परिजन कोर्ट में बार-बार बदल रहे थे बयान
दुबारी निवासी नत्थू ने अपने ही बेटे राजकुमार निषाद उर्फ भीमसेन के खिलाफ नाती की कुल्हाड़ी से काट कर हत्या की प्राथमिकी दर्ज कराई थी। जिसमें आरोपी की पत्नी शिवकुमारी व बच्चे अनुज, कोमल और कुंती गवाह थे लेकिन कोर्ट में सभी बयान से मुकर गए।
बेटी कोमल उर्फ उर्मिला भी बयान से पलट गई थी। बाद में जिला शासकीय अधिवक्ता श्याम सुंदर मिश्र की पूछताछ में उसने बार-बार बयान बदला। एक बयान में कहा कि सत्यम की चोट देख कर वह चिल्लाई, जिस पर उसके बाबा नत्थू, मां, भाई बहन आ गए थे लेकिन पापा भाग गए।
परिजनों के कहने पर पापा को छुड़ाने के लिए बयान दे रही हूं। बाबा व मां ने कहा कि झूठ बोल देना, सही बात मत बताना, साथ ही कह देना कि पापा का दिमाग ठीक नहीं था। इसलिए सत्यम को मारा है।