ओलावृष्टि, अतिवृष्टि व सूखे से जूझ रहे जिले के किसान अब औद्यानिक खेती में किस्मत आजमा रहे हैं। जिले में पिछले वर्ष की तुलना में इस वर्ष दोगुने क्षेत्रफल में किसानों ने औद्यानिक खेती की है। इसके लिए उद्यान विभाग भी लगातार किसानो को योजनाओ का लाभ दे रहा है। जिले के एक किसान ने पछेती आलू की खेती की है।
मुख्यालय से पांच किमी दूर छिपनीबाहर खेड़ा गांव के किसान अवधेश सिंह ने इस बार औद्यानिक खेती की है। इसके लिए उन्होंने गांव के पास स्थित अपने खेत की जमीन को समतल कराया है। उन्होंने बताया कि इस जमीन पर गेहूं, ज्वांर आदि की बुआई करते थे। पैदावार नहीं होने से इस बार आलू बोने का फैसला लिया।
मगर जब तक वह अपने खेत को समतल करके तैयार करते आलू की बुआई का समय लगभग खत्म था। बाजार में बीज के भाव सुनकर वह निराश हो गए। अवधेश ने बताया उसी समय अमर उजाला के छह दिसंबर के अंक में उद्यान विभाग में आया आलू का बीज की खबर पढ़ी। जिसमें आठ सौ रुपये प्रति क्विंटल सब्सिडी पर बीज मिलने की जानकारी दी गई थी। इस पर उम्मीद जगी और उन्होंने विभाग से संपर्क किया।
विभाग से सब्सिडी पर 15 क्विंटल आलू का बीज लेकर दो बीघे में बोया। आज वह आलू की फसल देखकर बेहद खुश हैं। अवधेश के अनुसार उसने बताया फसल से लगभग 80 से 90 क्विंटल आलू की पैदावार की उम्मीद है। अब वह आलू को कोल्डस्टोर में रखेंगे और अगले सीजन में 12 बीघा में बुआई करेंगे।