खेत में चने की कम पैदावार देखकर सदमे से महिला किसान का हार्टफेल हो गया। खेत में ही उसकी मौत हो गई। घरवालों ने पुलिस को घटना की सूचना दी पर पोस्टमार्टम कराने से इंकार कर दिया।
अहिरी ग्राम पंचायत के बालापुर मजरा निवासी सुदिया (40) पत्नी वीरेंद्र शनिवार शाम खेत में चने की मड़ाई कर रही थी। इस दौरान उम्मीद से बहुत कम पैदावार मिली। ये देख अचानक सुदिया चक्कर खाकर गिर गई और उसकी मौत हो गई। मृतका के देवर शिवमूरत पुत्र माताबदल और अन्य परिजनों ने बताया कि ओलावृष्टि और अतिवृष्टि के कारण फसल को हुए नुकसान के कारण सुदिया को सदमा लगा और उसका हार्टफेल हो गया।
शिवमूरत ने इसकी सूचना थाने में दी। रविवार को सुदिया का अंतिम संस्कार कर दिया गया। उधर, एसओ सुरेंद्र सिंह ने बताया कि तहरीर तो मिली है पर सुदिया के परिजनों ने पोस्टमार्टम कराने से इंकार कर दिया। इस वजह से आगे कार्रवाई नहीं की गई।
प्रधानपति शारदा प्रसाद और बीडीसी सदस्य अनूप कुमार द्विवेदी उर्फ गमल महाराज ने बताया कि वे लोग इसकी जानकारी प्रशासन को देंगे और मृतका के परिजनों को मुआवजा दिलाने की कोशिश करेंगे। तहसीलदार कतवारू राम ने बताया कि मृतका के परिजनों को पारिवारिक लाभ योजना ये सहायता दिलाने का प्रयास किया जाएगा।
चार क्विंटल की जगह सिर्फ बीस किलो चना
मृतका के देवर शिवमूरत ने बताया कि उसके पिता माताबदल की 12 बीघे खेती तीन भाइयों में बंटी। इससे सुदिया के परिवार के हिस्से में तीन बीघे जमीन आई। इसमें से उसने आधे में अरहर और आधे में चने की फसल बोई थी। अरहर में पाला पड़ने से फसल पूरी तरह चौपट होने की आशंका है।
वहीं डेढ़ बीघे में चार क्विंटल की जगह करीब बीस किलो ही चना हुआ। इसके चलते ही सुदिया को सदमा लगा। प्रधान पति शारदा प्रसाद ने बताया कि सुदिया का बड़ा पुत्र राधेश्याम घर की माली हालत ठीक न होने के चलते कुछ दिन पहले ही गुजरात कमाने चला गया।
सुदिया का छोटा पुत्र हरेराम है, जिसकी अभी शादी नहीं हुई। सुदिया के पति वीरेंद्र की 18 साल पहले ही मौत हो गई थी। शिवमूरत ने बताया कि उसके पिता की भी मौत खेत में चार माह पहले हुई थी। उसने तब भी सूचना दी थी पर कोई मुआवजा नहीं मिला।