दीनदयाल शोध संस्थान कृषि विज्ञान केंद्र गनीवा द्वारा पौध किस्म संरक्षण एवं कृषक अधिकार प्राधिकरण के तत्वावधान में मंगलवार को कृषक जागरूकता संगोष्ठी और प्रशिक्षण का आयोजन किया गया। इसमें किसानों को परंपरागत किस्मों के संरक्षण के प्रति सचेत रहने को कहा गया।
कार्यक्रम की अध्यक्षता डीआरआई के प्रधान सचिव डा. भरत पाठक ने की। प्राधिकरण के रजिस्ट्रार डा. रवि प्रकाश ने कहा कि यह प्राधिकरण किसानों को प्रजातियों को पंजीकृत करने और उनके अधिकारों को मान्यता देने का काम कर रहा है। अगर कोई कंपनी बीज देती है, पर उससे उत्पादन नहीं मिलता तो इसकी शिकायत भी प्राधिकरण में की जा सकती है।
बायोवर्सिटी इंटरनेशनल के एशिया पैसिफिक देशों के क्षेत्रीय निदेशक डा. पीएन माथुर ने कहा कि भारत में कम्युनिटी जीन बैंक की स्थापना के माध्यम से बीजों को संरक्षित किया जा रहा है। बांदा कृषि एवं प्रौद्योगिकी विवि के कुलपति डा. एसएल गोस्वामी ने बताया कि विवि गनीवां केंद्र के साथ काम करने को तत्पर है। भारतीय पशु चिकित्सा परिषद के अध्यक्ष डा. उमेश शर्मा ने कहा कि दुग्ध उत्पादन का उचित मूल्य किसानों को नहीं मिलने की वजह से ही वह इसमें रुचि नहीं लेता। गुजरात में अगर पशु बीमार हो तो एक फोन काल पर डाक्टर उपस्थित हो जाता है, यूपी में भी ऐसी व्यवस्था की जरूरत है।
नेहरू युवा केंद्र के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष डा. विष्णुदत्त शर्मा ने किसानों को सीमित क्षेत्रफल में अधिकतम उत्पादन दिलाने के लिए कृषि विज्ञान केंद्र की सराहना की। पौध किस्म संरक्षण एवं कृषक अधिकार प्राधिकरण के अध्यक्ष डा. आरआर हाचिनल ने बताया कि देशी जीन का रजिस्ट्रेशन कराकर किसान नाम भी कमा सकते हैं। मौके पर संगठन सचिव अभय महाजन, कार्यक्रम समन्वयक डा. नरेंद्र सिंह समेत अन्य किसान मौजूद रहे।