फोटो न- 12सीकेटीपी 02 शहर के डाक बंगला के पास बौर से लदा आम का पेड़। संवाद
चित्रकूट। जिले में इस साल आम की अच्छी पैदावार होने की संभावना जताई जा रही है। मार्च माह में आम के पेड़ों पर समय से बौर आ गई है, जिससे आसपास का वातावरण सुगंधित हो गया है। अनुकूल मौसम को देखते हुए किसान इस बार बंपर फसल की उम्मीद कर रहे हैं।
जिले के कई किसानों ने आम के बगीचे लगाए हुए हैं। प्रगतिशील किसान योगेश जैन और रेवती रमण त्रिपाठी ने बताया कि इस साल आम की बौर समय से आई है। उन्होंने कहा कि यदि मौसम इसी तरह अनुकूल रहा तो आम की अच्छी पैदावार होगी। चित्रकूट जिले में कलमी, मालदहा सहित देशी आम की कई किस्में पैदा होती हैं। किसान इन्हें बाजार में बेचने का कार्य भी करते हैं।
गनीवा कृषि फार्म के वैज्ञानिक मनोज शर्मा ने बताया कि आम भारत में सबसे लोकप्रिय फलदार वृक्षों में से एक है। उनकी अच्छी पैदावार के लिए किस्म का सही चयन और उचित देखभाल करना बहुत जरूरी है।
आम की प्रमुख किस्में
भारत में दशहरी, लंगड़ा, चौसा, आम्रपाली, तोतापरी, हिमसागर और मालदहा जैसी कई किस्में पाई जाती हैं। लंगड़ा आम अपनी विशिष्ट खुशबू और रसीलेपन के लिए प्रसिद्ध है। तोतापरी अपनी तोते की चोंच जैसी बनावट और खट्टे-मीठे स्वाद के कारण आसानी से पहचाना जाता है। दशहरी आम अपनी अधिक मिठास और रसीले स्वाद के लिए जाना जाता है।
बौर बचाने के लिए वैज्ञानिक सलाह
वैज्ञानिक मनोज शर्मा ने आम की बौरों को झड़ने से रोकने के लिए महत्वपूर्ण सलाह दी है। उन्होंने बताया कि कल्याणी फिक्स्ट अल्फा नेफ्थाइल एसिटिक एसिड को पानी में मिलाकर छिड़काव करना चाहिए। यह छिड़काव बौर को गिरने से बचाने में मदद करता है, जिससे आम की फसल को नुकसान से बचाया जा सकता है। उचित देखभाल से किसान बेहतर उपज प्राप्त कर सकते हैं।