राजकीय पालीटेक्निक मानिकपुर मात्र चार लोगों के स्टाफ के बल पर संचालित हो रहा है। प्रभारी प्रधानाचार्य आरके पटेल ने बताया कि क कालेज बनने के बाद से यहां स्थायी प्रधानाचार्य की तैनाती नहीं की गई। 29 सितंबर 2013 में तत्कालीन जिलाधिकारी ने खाली पड़े भवन तहसील कार्यालय खोलने के लिए अधिगृहीत किया था। जिसके कुछ माह बाद ही यहां पालीटेक्निक की कक्षाएं संचालित की गई। नीचे होने वाली चहल- पहल और भारी शोर- शराबे के बीच छात्रों का भविष्य अंधकार में है। वहीं प्रभारी प्रधानाचार्य नीचे होने वाले शोर- शराबे से बेफि क्र है। जबकि छात्र भारी शोर शराबे के कारण पढ़ाई प्रभावित होने की बात कह रहे है। संस्थान में चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी की नियुक्ति न होने से संस्थान में चारों तरफ गंदगी का अंबार लगा हुआ है। वहीं संस्थान में अर्द्घनिर्मित छात्रावास बजट के अभाव में अधूरा पड़ा है।
एक ट्रेड पर ही मिल रही ट्रेनिंग
मानिकपुर पालीटेक्निक में बोर्ड द्वारा चार ट्रेडों इलेक्ट्रानिक्स, इलेक्ट्रिकल, सिविल और मैकेनिकल को मान्यता है। इसमें से इलेक्ट्रानिक्स ट्रेड ही संचालित है। संस्थान में कुल 180 सीटों में से 120 सीटों पर ही छात्र पंजीकृत हैं। प्रभारी प्रधानाचार्य ने बताया कि सभी ट्रेडों के लिए लगभग 60 लोगों के स्टॉफ की जरूरत है। जिससे लिए समय समय पर आयोग को अवगत कराया जाता है। आयोग से भर्ती के बाद अन्य तीनों ट्रेडों का संचालन किया जाएगा।
लैब में पड़ा ताला
छात्रों ने बताया कि प्रेक्टिकल न होने से तकनीकि ज्ञान नहीं मिल पा रहा है। कॉलेज में बनी इलेक्ट्रिानिक्स लैब में ताला पड़ा रहता है। ऐसे में किस तरह प्रैक्टिकल होगा। उन्होंने बताया कि कई विषयों के शिक्षक न होने से कोर्स अधूरा रह जाता है। जिससे छात्रों का भविष्य अंधकार में है।