फोटो- 5- सयुंक्त राष्ट्र के सतत विकास लक्ष्यों पर आयोजित अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन में बेवसाइड की ला
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चित्रकूट। दीनदयाल शोध संस्थान (डीआरआई) की ओर से शुक्रवार को संयुक्त राष्ट्र के सतत विकास पर आधारित प्रथम तीन दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन का आयोजन हुआ। बतौर मुख्य अतिथि शामिल केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने कहा कि आयुर्वेद शिक्षा, उद्यमिता, गो पालन, जैविक खेती, प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने पर जोर दिया।
भारतरत्न नाना जी का ग्राम विकास का मॉडल विश्व के लिए उपयोगी है। चित्रकूट क्षेत्र के 500 गांवों में हुए प्रयोग को विश्व के विभिन्न देशों में प्रभावी बताया गया है। विवेकानंद सभागार में उन्होंने गोपालन, खेती आदि की जानकारी देने वाली वेबसाइट को भी लांच किया। मध्य प्रदेश राज्य नीति आयोग के उपाध्यक्ष प्रो. सचिन चतुर्वेदी ने कहा कि इस अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन के माध्यम से भारत के विकास का नया खाका तैयार होगा। वर्ष 2014 के पश्चात संयुक्त राष्ट्र ने यह प्रस्ताव रखा था, जिस पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अमेरिका में हस्ताक्षर किए थे।
अंतराष्ट्रीय सम्मेलन के संयोजक वसंत पंडित ने बताया कि इसमें चित्रकूट में पानी की कमी, आदिवासी बहुल और दूरदराज के इलाकों में संघर्ष मुक्त और आत्मनिर्भर गांवों के लिए अपने दृष्टिकोण का प्रदर्शन किया जाएगा। संस्थान के प्रधान सचिव अतुल जैन ने कहा कि सस्टेनेबल गोल के 17 बिंदुओं पर कार्य करना है। सतना के सांसद गणेश सिंह ने कहा कि यह आयोजन सतत विकास को लेकर हो रहा है।
सम्मेलन में पहले दिन चित्रकूट-बांदा के सांसद आरके सिंह पटेल, सतना सांसद गणेश सिंह, राष्ट्रीय बाल अधिकार एवं संरक्षण आयोग के चेयरमैन प्रियंक कानूनगो की मौजूदगी में एसडीजी गोल्स और सेमिनार संबंधित संपूर्ण जानकारी के लिए एसडीजी इंटरवेंशन डॉट ओआरजी नाम की वेबसाइट को लांच किया गया। दक्षिण एशिया में एसडीजी का काम देख रहीं डॉ. नित्या केमकर लंदन से ऑनलाइन जुड़ीं। इसके अलावा डॉ. काकोली घोष रोम, एरिक सोलहेम पेरिस व शोम्बी शार्प रेजिडेंट को-ऑर्डिनेटर का भाषण ऑनलाइन हुआ।
संयुक्त राष्ट्र के तय कार्यक्रमों का सरकार कर रही प्रतिनिधित्व
चित्रकूट। केंद्रीय मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने पत्रकारों से कहा कि संयुक्त राष्ट्र की ओर से तय किए गए विकास कार्यक्रमों का केंद्र सरकार प्रतिनिधित्व कर रही है। मनरेगा, महिला सशक्तीकरण के लिए आजीविका की दृष्टि से 70 लाख, स्वयं सहायता समूह से आठ करोड़ महिलाएं जुड़ी हैं। (संवाद)