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प्रधान नहीं बन सकेंगे डाकू गौरी के परिजन

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चित्रकूट/मानिकपुर। इस बार के परसीमन से एक बात तो तय हो गई है कि डाकू गौरी यादव की मां निवर्तमान प्रधान राजरानी अपने गांव ददरीमाफी से चुनाव नहीं लड़ पाएगी। जबकि डाकू रहे खड़ग सिंह के पास अभी मौका खुला है। उसकी पत्नी मायादेवी मडैय्यन गांव की निवर्तमान प्रधान है और इस बार भी वह चुनाव लड़ सकेंगी।
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त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव के लिए सीटों का आरक्षण जारी होते ही सबसे ज्यादा ग्राम प्रधान पद के लिए चर्चा हो रही है। हर गांव के संभावित दावेदार अपनी सीट के आरक्षण के हिसाब से आगे की रणनीति बनानी शुरु कर दी है। इसी कड़ी में आरक्षण के अनुसार मानिकपुर ब्लाक क्षेत्र के ददरी माफी गांव की सीट अनुसूचित जाति महिला के लिए आरक्षित हो गई है। मडैय्यन की सीट सामान्य है। ऐसे में अब यह तो लगभग तय हो गया है कि ददरीमाफी गांव से डाकू गौरी यादव की निवर्तमान प्रधान मां राजरानी इस सीट से चुनाव ही नहीं लड़ पाएगी। वैसे भी इस बार पुलिस के दबाव के चलते डाकू गौरी ने गांव में एलान करा दिया कि मां चुनाव नहीं लडे़गी। अब आरक्षण के हिसाब से डाकू का कोई परिजन भी यहां से प्रधान नहीं बन पाएगा। वहीं मडैय्यन गांव में निवर्तमान प्रधान मायादेवी पहले डाकू रह चुके खड़ग सिंह की पत्नी है। वर्ष 2015 में सीट बीसी महिला होने के कारण वह चुनाव लड़ी थी और आरोप लगे थे कि डाकू खडग सिंह ने डाकू गौरी यादव की मदद से दबाव बनाकर चुनाव जीता था। अबकी बार यह सीट सामान्य घोषित है तो यह तय है कि डाकू रह चुका खड़ग सिंह फिर से पत्नी को चुनाव लड़ाएगा। उधर, पुलिस अधीक्षक अंकित मित्तल का कहना है कि चुनाव में किसी भी तरह डकैतों का हस्तक्षेप नहीं होने देंगे। डाकू गौरंी गैंग के खिलाफ तो एडीजी, आईजी और स्वयं जंगल में सर्चिंग कर चुके हैं। इस कारण डकैतों के हौसले पस्त हैं।
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