चित्रकूट। न्यायिक मजिस्ट्रेट-प्रथम सृष्टि शुक्ला की अदालत ने घरेलू हिंसा में पति राहुल त्रिपाठी को पत्नी मंजुला देवी को आठ हजार रुपये मासिक भरण-पोषण और 25 हजार रुपये का मुआवजा देने का आदेश दिया है। यह फैसला घरेलू हिंसा से महिलाओं का संरक्षण अधिनियम, 2005 के तहत दायर याचिका पर आया है। अदालत ने पति को किसी भी प्रकार की शारीरिक या मानसिक प्रताड़ना से भी रोका है।
कौशांबी के महेवाघाट के डकशरीरा व हाल पता राजापुर थाना क्षेत्र के मुकाम भंभेट निवासी मंजुला देवी ने अदालत में शिकायत दर्ज कराई। बताया कि उनकी शादी 27 अप्रैल, 2018 को राहुल त्रिपाठी से हुई थी। उन्होंने आरोप लगाया कि ससुराल पक्ष ने बुलेट बाइक के लिए दो लाख रुपये की अतिरिक्त दहेज की मांग की। मांग पूरी न होने पर उनके साथ मारपीट व मानसिक प्रताड़ना की गई। उन्हें घर से निकाल दिया गया। राहुल ने इन आरोपों का खंडन किया। उन्होंने दावा किया कि मंजुला ससुराल में नहीं रहना चाहती थीं। अदालत ने पति के इन दावों के समर्थन में कोई विश्वसनीय सबूत नहीं पाया। अदालत ने राहुल को साझा गृहस्थी में रहने का आदेश दिया गया है। अदालत ने पति की आय और क्षमता को देखते हुए आठ हजार रुपये मासिक भरण-पोषण राशि को उचित माना। यह राशि प्रत्येक माह की 10 तारीख तक देय होगी। हालांकि, मंजुला देवी की मकान, कृषि भूमि और साझा गृहस्थी की संपत्ति में हिस्सेदारी की मांग को घरेलू हिंसा अधिनियम के तहत स्वीकार नहीं किया गया।
जुर्म कबूलने पर 2500 रुपये का अर्थदंड और सजा
चित्रकूट। सिविल जज सीनियर डिवीजन/एफटीसी न्यायालय के अश्विनी कुमार उपाध्याय ने लापरवाही से वाहन चलाकर घायल करने के मामले में जुर्म कबूलने वाले राघवेंद्र को न्यायालय उठने तक की सजा दी। साथ ही उस पर 2500 रुपये जुर्माना भी लगाया।
कर्वी कोतवाली में राघवेंद्र पर लापरवाही से वाहन चलाने के मामले में विभिन्न धाराओं में प्राथमिकी दर्ज कराई गई थी। पक्ष व विपक्ष दोनों की दलीलें सुनीं और बयान व साक्ष्य के आधार पर अदालत ने आरोपी को दोषी करार दिया। अदालत ने दोषी को न्यायालय उठने तक की सजा सुनाई। साथ ही 2500 रुपये का जुर्माना लगाया गया। अर्थदंड जमा न करने पर उसे 15 दिन का अतिरिक्त साधारण कारावास भुगतना होगा। सभी सजाएं एक साथ चलेंगी। (संवाद)
आरोपी को 20 हजार रुपये के मुचलके पर मिली जमानत
चित्रकूट। न्यायिक मजिस्ट्रेट-प्रथम न्यायालय सृष्टि शुक्ला ने मार्ग दुर्घटना के मामले में आरोपी लक्ष्मण सिंह को जमानत दे दी। उन्हें 20 हजार रुपये के व्यक्तिगत मुचलके और इतनी ही राशि की एक जमानत दाखिल करने पर रिहा किया गया।
रैपुरा थाना क्षेत्र में लक्ष्मण सिंह पर विभिन्न धाराओं के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई थी। इस मामले में आरोपी ने अदालत में आत्मसमर्पण कर जमानत याचिका प्रस्तुत की थी। अधिवक्ता ने तर्क दिया कि यह मामला जमानती है और यह पहली जमानत याचिका है। न्यायालय ने दलीलें सुनने के बाद पाया कि अपराध जमानती है। न्यायाधीश ने जमानत याचिका स्वीकार कर ली। (संवाद)
मारपीट व धमकी देने में आरोपी को मिली जमानत
चित्रकूट। न्यायिक मजिस्ट्रेट-प्रथम सृष्टि शुक्ला ने मारपीट और धमकी देने के मामले में आरोपी वीरेंद्र शुक्ला और राजा बाबू पांडेय उर्फ शिवभूषण को जमानत दे दी है। प्रत्येक 20 हजार रुपये का व्यक्तिगत बंधपत्र और इतनी ही धनराशि की एक जमानत दाखिल करने पर रिहा करने का आदेश दिया। यह रैपुरा थाना क्षेत्र से जुड़ा है।
रैपुरा थाना क्षेत्र दिवानी निवासी वीरेंद्र शुक्ला और राजापुर थाना क्षेत्र के छीबो निवासी राजा बाबू पांडेय उर्फ शिवभूषण के खिलाफ वर्ष 2025 में मारपीट और धमकी देने के आरोप में थाने में प्राथमिकी दर्ज की गई थी। दोनों आरोपियों ने आत्मसमर्पण किया था और न्यायालय में जमानत अर्जी डाली थी। वीरेंद्र शुक्ला की पत्नी ने घरेलू विवाद के चलते अपने माता-पिता के बहकावे में आकर यह प्राथमिकी दर्ज कराई थी। न्यायालय ने पाया कि अभियुक्तों पर आरोपित अपराध सात वर्ष से अधिक कारावास से दंडनीय नहीं है। न्यायालय ने जमानत का आधार पर्याप्त माना और दोनों की जमानत याचिका स्वीकार कर ली। (संवाद)