बुंदेलखंड के लोग सूखे से बेहाल है। प्रदेश सरकार ने सूखाग्रस्त क्षेत्र भी घोषित कर दिया हैं, लेकिन अब तक केंद्र को सूखे की रिपोर्ट नहीं भेजी है। इसके बावजूद केंद्र सरकार ने किसानों के लिए 1300 करोड़ रुपये जारी कर दिए हैं। बुंदेलखंड पैकेज का उपयोग कहीं दिखाई नहीं पड़ता है। प्रदेश के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव व कांग्रेस के राहुल गांधी इस पैकेज का दुरुप्रयोग करने वालों के खिलाफ आवाज नहीं उठाते।
भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष लक्ष्मीकांत बाजपेई ने शुक्रवार को जिले के कुछ सूखा प्रभावित गांव का दौरा करने के बाद मुख्यालय में पत्रकार वार्ता के दौरान यह बात कही। सांसद आवास में उन्होंने कहा कि सूखे से किसानों की कमर टूट गई है। प्रदेश सरकार की गलत नीतियों के चलते प्रभावित किसानों को पूरा मुआवजा नहीं मिला है। कुछ किसानों को 700 रुपये की चेक देकर राहत के नाम पर मजाक किया गया है। जबकि नियम ये हैं कि किसी को डेढ़ हजार से कम की चेक न दी जाए। राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम लागू होने के बाद भी पात्रों को सस्ता राशन नहीं मिल रहा है।
इसका कारण कोटेदार हैं जो पहले से ही गरीबों का राशन न बांटने के लिए प्रसिद्ध हैं। किसान परिवार बिजली, पानी के संकट से जूझ रहा है। खुद के खाने के साथ मवेशियों को पालना कठिन है। गांव में मवेशियों को चारा नहीं मिल रहा है। क्षेत्र के अस्सी प्रतिशत खेतों में फसल नहीं है। पत्रकारों के सवाल पर उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार किसान हितैषी है। हाल ही में फसल बीमा योजना लागू की गई है।
जिसमें किसी भी स्तर की फसल वाले किसान को नुकसान होते ही 25 प्रतिशत तत्काल मुआवजा मिलेगा और बाकी का भुगतान भी जल्द ही उसके बैंक खाते में भेजा जाएगा। भाजपा का लक्ष्य वर्ष 2022 तक सभी गांव में भरपूर बिजली व पानी देना है। इस दिशा में केंद्र सरकार अच्छा काम कर रही है। बुंदेलखंड के किसानों का केसीसी का कर्ज माफ होना चाहिए। उन्होंने कहा कि क्षेत्र की स्थिति की जानकारी केंद्र व प्रदेश सरकार को दी जाएगी।