संवाद न्यूज एजेंसी
चित्रकूट। बलदाऊगंज निवासी डॉ. मलखान सिंह ताशकंद स्टेट यूनिवर्सिटी, उज्बेकिस्तान में आयोजित अंतरराष्ट्रीय सेमिनार का हिस्सा बने। बृहस्पतिवार को वह वापस चित्रकूट पहुंचे, जहां उनका स्वागत किया गया। इस मौके पर उन्होंने वहां के अनुभव को स्थानीय लोगों के साथ साझा किया। यह सेमिनार 18 व 19 सितंबर 2025 को आयोजित किया गया था।
डॉ. मलखान सिंह ने बताया कि उनके व्याख्यान का विषय भारत की संस्कृति का वैश्विक महत्व था। उन्होंने सर्वे भवंतु सुखिनः और वसुधैव कुटुंबकम को भारतीय संस्कृति की मूल भावना बताते हुए कहा कि भारतीय संस्कृति का आधार मानव कल्याण, सह अस्तित्व और विश्व बंधुत्व है। इसके साथ ही उन्होंने आचार-विचार और संस्कार को समरसता, समन्वय और समतामूलक समाज निर्माण का प्रमुख आधार बताया।
कार्यक्रम में उपस्थित विद्वानों और प्रतिभागियों ने डॉ. मलखान सिंह और अन्य वक्ताओं के विचारों की सराहना की। यह सेमिनार भारत और उज्बेकिस्तान के बीच सांस्कृतिक संबंधों को और सुदृढ़ करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हुआ।
भारतीय भाषा केंद्र, जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय की अध्यक्षा प्रो. वंदना झा ने कहा कि यह गौरव की बात है कि भारतीय भाषा केंद्र से डॉ. मलखान सिंह को ताशकंद स्टेट यूनिवर्सिटी ऑफ ओरिएंटल स्टडी, उज्बेकिस्तान में व्याख्यान हेतु आमंत्रित किया गया। उन्होंने अपने व्याख्यान के माध्यम से भारत का मान बढ़ाया है। यह जेएनयू और चित्रकूट दोनों के लिए गर्व की बात है।