‘लालच बुरी बला’। खेतीबाड़ी में इस कहावत का असर साफ अब साफ दिखने लगा है। रासायनिक खादों के अंधाधुंध इस्तेमाल से किसान अपनी कीमती जमीनों को ‘बंजर’ बना रहे हैं।
उनकी यह लालच दिन-प्रतिदिन खेतों को ‘कोमा’ की तरफ ले जा रही है। ज्यादा पैदावार की लालच किसानों पर भारी पड़ेगा। मृदा परीक्षण विभाग के मुताबिक खेतों से फास्फोरस और नाइट्रोजन नदारद हो रहे हैं। सबसे बुरी हालत मानिकपुर ब्लाक की है।
जैविक खाद दरकिनार कर किसान अब अधिक पैदावार के लिए रासायनिक खादों का उपयोग कर रहे हैं। पिछले कुछ सालों में खाद का इस्तेमाल ज्यादा होने लगा। विशेषज्ञों द्वारा खाद के खतरों से आगाह करने के बावजूद इसके प्रयोग पर लगाम नहीं लग रही।
ज्यादा पैदावार की लालच किसानों के सिर चढ़कर बोल रही है। नतीजे में रासायनिक खादों के जबरदस्त इस्तेमाल से उपजाऊ मिट्टी बंजर हो रही है। यह जानते हुए भी किसान इसका जमकर इस्तेमाल कर रहा है।
मृदा परीक्षण विभाग प्रभारी राम नरेश दीक्षित ने बताया कि डीएपी और यूरिया खादों के इस्तेमाल से खेतों के पोषकतत्व नदारद हो रहे हैं।
फास्फोरस और नाइट्रोजन तेजी से घट रहे हैं। जैविक खादों से पोषकतत्व खेत में बरकरार रहते हैं। खबरदार किया कि किसानों ने सुध नहीं ली तो आने वाले समय में खेत की उपजाऊ शक्ति खत्म हो जाएगी। जिले में मानिकपुर और मऊ ब्लाक ‘वेरी-लो’ श्रेणी में हैं। उन्होंने किसानों के फायदे के लिए खेत मिट्टी की जांच जरूरी बताई।