मुख्यालय के मोबाइल कैश काउंटर में मौजूद दुकानदार से जानकारी करते ग्राहक।
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नोट बंदी का असर जहां थोक व फुटकर व्यापार पर सीधा पड़ रहा है। वहीं मोबाइल कंपनियां भी केंद्र सरकार व आरबीआई के निर्देशों का खुला उल्लंघन कर 500 के नोटों से रिचार्ज करने से इंकार कर रही हैं। मोबाइल और डिश टीवी वालोें के पास कंपनी के मैसेज आते हैं कि पुराने 500 के नोट से 600 का टाक टाइम व अन्य सुविधाएं ले सकते हैं।
लेकिन दुकानदार पुराना नोट देखते ही बैरंग लौटा देता है। ग्राहकों की दुकानदारों से तीखी बहस भी होती है तो दुकानदार भी अपनी मजबूरी बताता है।500 व 1000 की पुरानी नोटों का प्रचलन बंद होने के बाद इन्हें बदलने व जमा करने के लिए केंद्र सरकार और आरबीआई ने कुछ स्थानों पर इनके प्रचलन पर रोक नहीं लगाई है।
उसी में मोबाइल व डिश टीवी चलाने वाली कंपनियों को भी आदेश है कि पुराने नोट से ग्राहकों के मोबाइल व टीवी रिचार्ज करें। इसके बाद सभी प्रमुख दूरसंचार कंपनियों ने सभी डिस्ट्रीब्यूटरों को आदेश दिया कि पुराने नोट से अभी 15 दिसंबर तक काम चलेगा। कंपनियों ने अधिक कमाई के उद्देश्य से ग्राहकों के सामने 500 में 600 का रिचार्ज करने का आफर भी रखा।
बीएसएनएल डिस्ट्रीब्यूटर राजेंद्र गुप्ता और टाटा के डिस्ट्रीब्यूटर राहुल गुप्ता ने बताया कि नोट बंदी से व्यापार मंदा हुआ है। कंपनी ने मोबाइल पर मैसेज जरूर पुराने नोट लेने का आदेश दिया है लेकिन डिस्ट्रीब्यूटर के पास लिखित आदेश नहीं है। कंपनी के कुछ अधिकारियों ने साफ कहा कि पुराने नोट न लें अन्यथा कैश में कोई माल नहीं मिलेगा।
मुख्यालय के मोबाइल-डिश टीवी रिचार्ज काउंटर के दुकानदार राजू लखानी ने बताया कि नोट बंदी के बाद बिक्री आधी से भी कम हो गई है। ग्राहक 500 की नोट लेकर मैसेज दिखाता है लेकिन डिस्ट्रीब्यूटर इन नोटों को लेने से इंकार करता है। ऐसे में प्रतिदिन ग्राहकों से विवाद भी होता है।
आरोप लगाया कि कंपनी वाले गलत मैसेज भेजकर सबको धोखे में रख रहे हैं। इसके अलावा फुटकर भी समस्या आती है। ग्राहक दो हजार का नोट लेकर सौ- दो सौ का रिचार्ज कराता है तो बाकी का फुटकर लौटाने के बाद बाकी दुकानदारी प्रभावित होती है।