फोटो- 11- मनरेगा व जल संरक्षण के कार्य का फावड़ा चलाकर शुभारंभ करते डीएम शेषमणि पांडेय व सीडीओ डा. म?
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चित्रकूट। जिलाधिकारी शेषमणि पांडेय व मुख्य विकास अधिकारी डॉ महेंद्र कुमार ने सोमवार को मनरेगा समेत अविरल जल योजनांतर्गत चल रहे कामों की शुरुआत के िलए खुद फावड़ा चलाया। अधिकारियों के फावड़ा चलाते देख अन्य अधिकारी व कर्मचारी भी इस काम में अपना योगदान दिया। मनरेगा कार्य व मजदूरों को काम देने के मामले में चित्रकूट जिला पूरे यूपी में पहले स्थान पर है।
सोमवार को मंदाकिनी नदी के पुनरोद्धार के लिए मनरेगा योजना के अंतर्गत भूमि संरक्षण अनुभाग, कृषि विभाग द्वारा माइक्त्रसे वाटर शेड ग्राम पंचायत डिलौरा में कराए जा रहे कार्यों एवं अविरल जल अभियान का शुभारंभ डीएम व सीडीओ ने किया। इस दौरान जिलाधिकारी ने कहा कि मनरेगा योजना के अंतर्गत जनपद में शुरू से ही प्रयास किया गया कि अधिक से अधिक लोगों को रोजगार उपलब्ध हो सके।
मुख्यमंत्री ने वीडियो कांफ्रेंसिंग के माध्यम से भी निर्देशित किया था कि 15 जून से विशेष अभियान चलाकर प्रवासी मजदूरों व अन्य लोगों को अधिक से अधिक रोजगार दिया जाए। पूरे जनपद पर 335 ग्राम पंचायतों में कुल 68451 श्रमिकों को रोजगार दिया जा रहा है। जिसमें अधिकांश प्रवासी मजदूर भी शामिल है। जनपद में आयुक्त चित्रकूटधाम मंडल बांदा के निर्देश पर अबिरल जल अभियान का भी शुभारंभ किया गया है। जिसमें जो नदी नाले सूखे रहते हैं उनमें मनरेगा के अंतर्गत खुदाई कराएंगे। जिससे ऐसे नदी नाले व तालाब पर पर्याप्त जल उपलब्ध हो सके।
जिलाधिकारी ने खंड विकास अधिकारी कर्वी तथा भूमि संरक्षण अधिकारियों को निर्देश दिए कि इस क्षेत्र में मनरेगा योजना के अंतर्गत अधिकाधिक कार्य व वृक्षारोपण भी कराएं। जिला विकास अधिकारी आरके त्रिपाठी, अधिशासी अभियंता सिंचाई आशुतोष कुमार, प्रभारी अधिशासी अभियंता लघु सिंचाई विनय कुमार श्रीवास्तव, खंड विकास अधिकारी सुनील सिंह, भूमि संरक्षण अधिकारी प्रथम, द्वितीय, तृतीय, ग्राम प्रधान आदि मौजूद रहे।
चित्रकूट। जनपद की समस्त 335 ग्राम पंचायतों में 15 जून 2020 को 1626 कार्य चल रहे हैं। जिस पर 68451 श्रमिक नियोजित है। मनरेगा कन्वर्जेंस के अंतर्गत 11 विभागों के 389 प्रस्ताव प्राप्त हुए थे। जिसके सापेक्ष 8 विभागों के 284 कार्य स्वीकृत किए जा चुके हैं। जिसमें 202410 मानव दिवसों का सृजन होगा। इसी प्रकार जनपद की भूमि संरक्षण की तीनों इकाइयों के 83 परियोजनाओं के प्रस्ताव प्राप्त हुए थे जो शत-प्रतिशत स्वीकृत किए जा चुके हैं। जिसमें 27403 मानव दिवसों का सृजन होगा।