सरकार चिकित्सा के नाम पर चाहे जितना खर्च करे और प्राथमिकताओं में इसे
लेने की बात कहे पर वास्तविकता में हालात जुदा है। चिकित्सकों, उपकरणों की
कमी झेल रहे अस्पतालों में मूलभूत सुविधाएं तक नदारद हैं। आलम यह है कि हर
तरफ गंदगी, पीने के पानी की पर्याप्त सुविधाएं नहीं और जिम्मेदारों से बात
करो तो उनकी बातें भी समझ से परे होती हैं। अस्पताल में ब्लड बैंक खुला और
फिर बंद भी हो गया। मंगलवार को सौ शैय्याओं वाले संयुक्त जिला अस्पताल का
जायजा लिया तो कई बातें सामने आईं। जिला अस्पताल का हाल, तस्वीरों की
जुबानी प्रस्तुत है--
हम अपनी मर्जी के मालिक
संयुक्त चिकित्सालय
के बाहर का ही हाल बदतर है। मेन गेट का ही हाल खराब है। बाहर पीकदान की
व्यवस्था नहीं है और इसकी कमी लोग वहीं दीवारों और फर्श पर थूककर पूरी कर
लेते हैं।
महिलाओं को होती है दिक्कत
पंजीयन केंद्र के बाहर हालांकि स्त्री
पुरुष की अलग अलग व्यवस्था है पर अक्सर एक ही कर्मचारी वहां बैठने की वजह
से महिलाओं को काफी दिक्कत होती है।
वैसे ही डाक्टर कम, वो भी नदारद
वैसे ही
चिकित्सकों की कमी है, जो हैं वे भी नदारद। अक्सर छुट्टी पर रहते हैं। ऐसे
में केबिन खाली पड़े रहते हैं। आज भी कुछ केबिन ऐसे ही थे।
गंदगी से पहचानो यही है चालू
अस्पताल
में पानी के लिए सीढ़ियों के नीचे, एक प्रसूता वार्ड के पास और एक मेडिसन
वार्ड के पास वाटर कूलर लगा है। जिस कूलर के पास सबसे ज्यादा गंदगी नजर आ
रही है, वहीं चालू है. बाकी दोनों बंद पड़े हैं। इसके अलावा किसी को पानी
की जरूरत हो तो वह बाहर लगे हैंडपंप की सेवाएं ले।
वो तो कुछ और समझ गए...
जिला
अस्पताल में चिकित्सक अपने काम में मशगूल थे। संवाददाता एक चिकित्सक के
पास पहुंचा तो वह बोले, फोटो खींच रहे हो, घाटे में रहोगे...। शायद उनका
आशय कुछ और था। जब उनसे बताया गया कि यहां के हालात पर खबर लिखी जा रही है
और आप जो कह रहे हैं कर रहे हैं वह भी छप जाएगा। तब बाद में वह अपनी गलती
मानने की बात कहने लगे और बोले, भाईसाहब, मैं गलत समझ गया, सारी।
न पर्याप्त स्टाफ और न पर्याप्त संसाधन
प्रभारी
सीएमएस डा. चौधरी ने बताया कि यहां पर कुछ 36 पद स्वीकृत हैं, जिनमें से
बीस पर चिकित्सक कार्यरत हैं। उन्होंने बताया कि अस्पताल अधीक्षक का ही पद
खाली चल रहा है। इसके अलावा चेस्ट फिजीशियन, सर्जन, नेत्र रोग विशेषज्ञ,
बाल रोग विशेषज्ञ, रेडियोलाजिस्ट, एथोलाजिस्ट, स्किन, कार्डियोलाजिस्ट,
स्त्री रोग विशेषज्ञ, जनरल फिजीशियन के पद रिक्त हैं। ईएनटी विशेषज्ञ लंबे
समय से छुट्टी पर हैं। अल्ट्रासाउंड मशीन रखी है पर चलाने वाला कोई नहीं
है। उन्होंने बताया कि डस्ट बिन के लिए ठेकेदार को कहा है। जल्द ही जरूरत
के मुताबिक चारों प्रकार के डस्ट बिन लगा दिए जाएंगे। उन्होंने बताया कि
चिकित्सकों को अपनी निर्धारित पोशाक एप्रेन पहनकर बैठने को कहा गया है।