कोषागार घोटाला
अफसर-कर्मचारी व दलालों के बैंक खाते व पेंशन की भेजी रकम में अंतर मिला
संवाद न्यूज एजेंसी
चित्रकूट। जिले के कोषागार में हुए बड़े घोटाले का मामला अब गहराता जा रहा है। ऑडिट टीम की रिपोर्ट और एसआईटी की जांच में पेंशनरों के खातों में भेजी गई धनराशि के विवरण में भारी अंतर पाया गया है। मामले में जेल में बंद आरोपी, विभाग के अकाउंटेंट अशोक वर्मा और पेंशनर राधेश्याम कलचिहा की जमानत याचिका जिला जज ने खारिज कर दी है।
जिला शासकीय अधिवक्ता श्यामसुंदर मिश्रा ने बताया कि इस मामले में कोषागार विभाग के एटीओ विकास सचान, एकाउंटेंट अशोक वर्मा, एटीओ संदीप श्रीवास्तव और रिटायर्ड एटीओ अवधेश प्रताप सिंह नामजद आरोपी हैं। इनमें विकास सचान की जमानत पहले ही खारिज हो चुकी है। शनिवार को अशोक वर्मा की जमानत पर हुई सुनवाई के दौरान काफी देर तक बहस चली। जहां अकाउंटेंट के अधिवक्ता ने उन्हें निर्दोष बताया, वहीं शासकीय अधिवक्ता ने तर्क दिया कि 2018 से अबतक के कार्यकाल में अशोक वर्मा ने सबसे अधिक समय तक अकाउंटेंट का काम देखा है और उनके पटल से लगभग 35 करोड़ का भुगतान हुआ है, जिसमें घोटाले में शामिल लोगों के भुगतान भी शामिल हैं। इसके अलावा, पेंशनर राधेश्याम कलचिहा पर 17 लाख 33 हजार से अधिक की धनराशि का मामला दर्ज है, जिसकी जमानत याचिका भी खारिज कर दी गई है।
सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, एसआईटी ने पेंशनरों और बिचौलियों के साथ-साथ विभागीय अधिकारियों की भूमिका को भी कई जगहों पर संदिग्ध पाया है। इसके चलते उनकी दोबारा जांच शुरू कर दी गई है। पहले भी इन अधिकारियों से उनकी संपत्ति, विभागीय पासवर्ड, पटल से भुगतान और डिजिटल हस्ताक्षर से संबंधित जानकारी ली गई थी, जिसमें कई बार गड़बड़ियां सामने आई थीं। इस बार जांच में और भी कर्मचारी व अधिकारी जांच के दायरे में आ सकते हैं। इन सभी से संपत्ति का ब्यौरा दो बार मांगा जा चुका है।
सभी संदिग्धों की होगी जांच, रिकवरी पर जोर
पुलिस अधीक्षक अरुण कुमार सिंह ने बताया कि घोटाला मामले में विभागीय अधिकारियों और कर्मचारियों की भूमिका की जांच जारी है। पेंशनरों, बिचौलियों और अन्य नामजद आरोपियों की जांच लगभग पूरी होने वाली है। किसी भी नामजद पेंशनर, बिचौलिया या विभागीय अधिकारी-कर्मचारी को बख्शा नहीं जाएगा।