अमर उजाला ब्यूरो
चित्रकूट। गोरक्षा के नाम पर सरकार व समाजसेवियों की पहल से निराश मथुरा के साधूसंतों की टोली सभी धार्मिक स्थलों की यात्रा कर जागरूकता फैला रही है। बुंदेलखंड की अन्ना प्रथा से लेकर गोरक्षा पर विशेष काम करने की जरूरत बताते हुए टीम के सदस्यों का कहना है कि भारत देश पहले सोने की चिड़िया इसी गोवंश पर आधारित आर्थिक सामाजिक व्यवस्था के कारण था। अब विदेशी संस्कृति व मांस मदिरा के अलावा बेरोजगारी व विदेशी खाद से भारत का भारी नुकसान हुआ है।
मथुरा से छह सितंबर को निकली गोरक्षा जनसंपर्क यात्रा के नायक सुरभि ग्लोबल नैतिक शिक्षा केंद्र मथुरा के स्वामी नारायण दास पूरी टीम के साथ मंगलवार को धर्मनगरी पहुंचे। जहां यात्रा का स्वागत कामदगिरी मुख्य द्वार के प्रमुख पुजारी मदनदास महराज ने किया। स्वामी नारायण दास ने बताया कि पूरे देश में गोरक्षा के प्रति जागरूकता बढ़ाने का काम चल रहा है। केंद्र व प्रदेश की सरकारों से कोई मतलब नहीं है लेकिन इस कार्य में सबकी मदद की जरूरत है। 20 सितंबर को यात्रा लखनऊ में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मिलकर पूरी जानकारी देगी।
जिसमें कई स्थानों पर गोशाला बनवाने का प्रस्ताव रखा जाएगा। गोवंश आधारित व्यवस्था पर जोर दिया जाए तो आर्थ्क लाभ भी होता है। इसके बाद तीन मार्च 2018 से मथुरा से दिल्ली तक की पदयात्रा भी निकाली जाएगी।
उन्होंने मुख्य द्वार पर पत्रकारों से बातचीत में कहा कि गाय पालने में लोगाें को शर्म आती है जबकि घरों में कुत्ते पाले जा रहे हैं। हिंसा की परंपरा बढ़ गई है। कोई भी गोमांस अथवा अन्य जानवरों के मांस के व्यापार को बढ़ावा न दें। पहले के जमाने में बुलपावर(गाय-बैल मिलकर खेती व अन्य काम में मदद करते थे) व मैनपावर मिलकर देश समाज की आर्थिक स्थिति को मजबूत बनाते थे अब विदेशी तकनीक पर आदमी को आश्रित किया जा रहा है। इस मौके पर मथुरा के गोपाल दास, कृपाशंकर, नत्थी लाल शर्मा, राधेश्याम, परशुराम, चंदन सिंह, राजवीर व शंकर आदि मौजूद रहे। यह यात्रा बुधवार को इलाहाबाद पहुंचेगी।