तरौंहा स्थित मां झारखंडी माता का मंदिर में पूजन करते भक्तगण।
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धर्म नगरी में चैत्र नवरात्र पर जगह-जगह देवी मंदिरों में पूजन हवन के साथ पूर्णाहुति हुई। देवी मंदिरों में भक्तों की लंबी कतारें लगी रहीं। तरौंहा की झारखंडी माता का मंदिर बेहद प्रसिद्ध है। मान्यता है कि इनकी पूजा करने वालों को मां कभी गलत रास्ते में नहीं भटकने देती, इन्हें बिछड़ों को मिलाने वाली माता भी कहा जाता है। भटकों को रास्ता दिखाती है मां झारखंडी।
मुख्यालय का ही एक हिस्सा तरौंहा के नाम से विख्यात है, जहां हिंदु मुस्लिम की एकता भी प्रसिद्ध है। यहीं बस्ती से थोड़ा दूर केवटरा मार्ग पर 35 फुट की उंचाई पर मां झारखंडी का मंदिर है। यह बेहद प्राचीन व दिव्य स्थान है। इस मंदिर की मूर्तियां देखने में जितनी छोटी लगती हैं, उतना ही बड़ा चमत्कार करती हैं, यहां सच्चे मन से प्रार्थना करने पर सही मार्ग पर सबको ले जाती है मां।
यह मंदिर परिसर बड़ा है, लेकिन मां का दरबार खुले आसमान के नीचे ही है। मान्यता है कि मां नहीं चाहती कि उन्हें मंदिंर के अंदर रखा जाए, जिसने भी उनके उपर छत या दीवार बनवाने का प्रयास किया तो वह सफल नहीं हुआ। झारखंडी माता बिछड़ों को मिलाने वाली माता कही जाती हैं।