धर्म नगरी के विकास को लेकर मध्यप्रदेश क्षेत्र के साधु संतों ने शुक्रवार को भी धरना दिया। अपर जिलाधिकारी ने धरना स्थल पर पहुंचकर साधु संतों से उनकी मांगों पर चर्चा की। सतना पुलिस अधीक्षक समेत कई अधिकारियों ने धरना समाप्त कराने का प्रयास किया, लेकिन संत नहीं माने।
धर्म नगरी का विकास न होने से साधु संत प्रदेश सरकार और अफसरों खफा हैं। विकास की मांग को लेकर जानकीकुंड के पास धरना प्रदर्शन कर रहे हैं। साधु संतों को कई बार अधिकारियों ने मनाने का प्रयास किया, लेकिन बात नहीं बन रही है। संतों का कहना है कि प्रदर्शन के बावजूद मांगे नहीं मानी गई तो क्रमिक अनशन करेंगे। उधर, 30 या 31 जुलाई को मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के चित्रकूट आने की संभावना है। इस कारणा साधु संतों के धरने से उनकी बेचैनी बढ़ती जा रही है।
संतों की मांगों में रजौला और हनुमानधारा बाईपास का निर्माण पूरा करने, बस स्टैंड पर बैठने की व्यवस्था, कामद्गिरि परिक्रमा मार्ग पर रिंग रोड का निर्माण, चित्रकूट को फ्रीजोन बनाने जैसी मांग कर रहे हैं। धरनास्थल पर सनकादिक महाराज, कामद्गिरी द्वार के महंत मदनगोपल दास, महाराज जानकी महल, सीताशरण महाराज, रामायणी कुटी के रामहृदय दास, गोपाल दास, बलराम दास, परमेश्वर दास, आनंद दास, सियाराम दास, बालकदास और माधवदास भी मौजूद रहे।
भाजपा नेता के आश्वासन पर माने
चित्रकूट में चल रहे साधु संतों के धरने को भोपाल से आए भाजपा नेता जितेंद्र नटोरिया ने बातचीत कर समाप्त करा दिया है। वह मुख्यमंत्री के प्रतिनिधि के रूप में धरने पर पहुंचे और बताया कि 31 को सीएम के आने पर सभी से मुलाकात कराई जाएगी। फिलहाल ओवरब्रिज के लिए तीन करोड़ 22 लाख और सीवर प्लांट के लिए तीन करोड़ 88 लाख रुपए का बजट स्वीकृत कर लिया गया है।