धर्मनगरी के जानकीकुंड के पास माला बेचता दक्षिण भारत का रमइयादास।
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चित्रकूट। दीपावली पर्व पर धर्म नगरी में लगने वाले पांच दिवसीय दीपदान मेला में दक्षिण भारत व छत्तीसगढ़ की महिलाओं ने पूरे परिवार के साथ दो दिन पहले से डेरा डाल दिया है। रुद्राक्ष सहित हाथों से बनाये जाने वाली विभिन्न तरह की मालाएं और अन्य वस्तुओं को बेचते हैं। पूरे मेला क्षेत्र में पटरी से लेकर दुकानें तक किराए पर लेकर दुकानदार लगाते हैं।
अनुमान के मुताबिक दीपावली मेले में धर्म नगरी मे ं40 लाख श्रद्धालुओं का जमावड़ा होगा। मेला में कई स्थानों से लोग व्यापार करने भी आते हैं। मेला में दक्षिण भारत की महिलाएं रुद्राक्ष और नग जड़ी अंगूठियां बेचने आती हैं। छत्तीसगढ़ की महिलाएं हाथों से बने गुलदस्ते, विभिन्न तरह की तस्वीरें व अन्य वस्तुओं को बेचती हैं।
सुलेखा, उर्वशी, ललिता अप्पा, हेमवती ने बताया कि वह लोग कई साल से दीपावली मेला में चित्रकूट आते हैं। मेला मेें उनके रुद्राक्ष के मालाओं की अच्छी बिक्री होती है। इसके साथ ही नग जड़ी अंगूठियों की भी बिक्री अच्छी रहती है। छत्तीसगढ़ की राजरानी, ननकी, कीर्ती बबिता ने बताया कि वह लोग दीपावली मेला में समान बचने के लिए तीन महीने पहले से हाथों से गुलदस्ते, पंखें, तस्वीरें आदि बनाने लगती हैं। अलग अलग गांव की महिलाएं पूरे परिवार के साथ मेला के दो दिन पूर्व से ही धर्म नगरी में डेरा जमा लेती हैं।
धर्मनगरी के साधू संताें ने बताया कि रुद्घाक्ष माला धारण करने से भगवान शिव की कृपा जाती है। दक्षिण भारत में रुद्राक्ष आसानी से मिल जाता है। वही समाज सेवियों ने बताया कि अंधविश्वास के कारण लोग ऐसी वस्तुएं लोग खरीदते हैं। यहां मेेले में बाहर से लाकर बेचने वाले ज्यादातर नकली माल ही लाते हैं।