चित्रकूट। जिले में सड़कों की खराब स्थिति यात्रियों के लिए बड़ी मुसीबत बन गई है। मानिकपुर और मारकुंडी तिराहा जैसे प्रमुख स्थानों पर बड़े-बड़े गड्ढे राहगीरों के लिए जान का जोखिम पैदा कर रहे हैं। यह समस्या महीनों से बनी हुई है। विभाग की उदासीनता के कारण कोई ठोस कार्रवाई नहीं हो पा रही है। नतीजतन, कई दुर्घटनाएं हो चुकी हैं।
कर्वी से मानिकपुर की ओर जाने वाले मार्ग पर, विशेषकर मारकुंडी तिराहा के पास, सालों से बड़े गड्ढे बने हुए हैं। स्थानीय निवासियों की शिकायतों पर कभी-कभार कुछ गिट्टियां डालकर काम चलाया जाता है। यह मरम्मत कुछ ही दिनों या एक महीने में फिर से उखड़ जाती है। इससे मानिकपुर नगर के अंदर यातायात प्रभावित होता है। सतना की ओर जाने वाले वाहनों को भी भारी असुविधा का सामना करना पड़ता है।
यह मार्ग सतना की ओर से आने वाले भारी वाहनों के लिए एक प्रमुख प्रवेश द्वार है। यहां की खराब सड़क इन वाहनों के लिए भी समस्या उत्पन्न करती है। मानिकपुर तहसील क्षेत्र के लगभग 50 से अधिक गांवों के लोग प्रतिदिन इसी मार्ग से आवागमन करते हैं। उनकी सुरक्षा और सुविधा दांव पर लगी हुई है।
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हादसों में कई गवां चुके जान :
मारकुंडी तिराहा पर बने गड्ढों में अक्सर बाइक और साइकिल सवार गिरकर घायल हो जाते हैं। दुर्भाग्यवश, इन गड्ढों के कारण कुछ लोगों की जान भी जा चुकी है। लगभग एक साल पहले, सतना की ओर से आ रहे एक ट्रक ने इसी तिराहे पर एक बाइक सवार रामा कोल को कुचल दिया था, जिससे उसकी मौके पर ही मृत्यु हो गई थी। एक अन्य घटना में, शाम को मजदूरी करके घर लौट रहा एक साइकिल सवार मजदूर गड्ढे में गिर गया और पीछे से आ रहे एक वाहन ने उसे कुचल दिया।
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नासूर बन गए मारकुंडी तिराहा पर गड्ढे
मानिकपुर के निवासी सुंदर यादव ने बताया कि मारकुंडी तिराहा पर बने गड्ढे स्थानीय लोगों के लिए एक नासूर बन गए हैं। उन्होंने कहा कि अक्सर बाइक और साइकिल सवार इन गड्ढों में गिरकर चोटिल हो जाते हैं। सुमित सिंह ने भी अपनी व्यथा व्यक्त करते हुए कहा कि गड्ढों को भरने के लिए विभाग से कई बार शिकायत की गई है, लेकिन इसका कोई असर नहीं हुआ। उन्होंने बताया कि कुछ महीने पहले गड्ढों में गिट्टियां डाली गई थीं, जो एक महीने से भी कम समय में बेकार हो गईं और गड्ढे फिर से उसी स्थिति में आ गए।
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बोले जिम्मेदार
मारकुंडी तिराहा पर पेयजल की पाइपलाइन अक्सर फट जाती है, जिससे सड़क पर पानी भर जाता है और गड्ढे बन जाते हैं। उन्होंने आश्वासन दिया कि गड्ढों की मरम्मत जल्द ही कराई जाएगी।
- नीरज सक्सेना, सहायक अभियंता, निर्माण खंड इकाई, लोक निर्माण विभाग