मिलावटखोर नकली खाद को भारत डीएपी के नाम से बाजार में बेचते थे
संवाद न्यूज एजेंसी
चित्रकूट। खरीफ सीजन शुरुआत होते ही खाद की कालाबाजारी का खेल शुरू हो गया है। असली डीएपी व यूरिया खाद में कम कीमत की राम गंगा ब्रांड खाद (जैविक खाद) की मिलावट की जा रही थी। बाद में बाजार में मिलावटखोर इस खाद को भारत डीएपी के नाम से बेचते थे। कालाबाजारी का यह खेल सुरौंधा गांव में काफी दिनों से चल रहा था। यहां से ग्रामीण अंचल की दुकानों में खाद पहुंचाई जा रही थी। जिससे कम लागत कर अधिक कमाई का जरिया बना लिया था। यह खुलासा बृहस्पतिवार को हुआ है।
राम गंगा (आर्गेंनिक) खाद की मिलीं बोरियों में शाहपुर एमपी रोड यूपी का पता दर्ज है। विभागीय जानकारों के अनुसार यह खाद प्रयागराज से लाई जा रही थी। इस खाद को जिले में कोई पंजीकरण नहीं है। इसमें मुख्य रूप से सड़ा हुआ गोबर, पेड़ पौधों व सब्जियों का कचरा, कंपोस्ट के साथ ही सूक्ष्म रूप में नाईट्रोजन, फास्फोरस, मैग्नीशियम मिलाया जाता है। इसके अलावा पोषक तत्व जैसे जिंक व आयरन मिलाए जाते हैं।
बाजार में जैविक खाद की कीमत 5000 से 600 रुपये है। जबकि सरकारी डीएपी की खाद कीमत 1350 रुपये है। जिसकी मात्रा 50 किलो है। वहीं बाजार में डीएपी खाद 17 से 18 सौ रुपये में मिलती है। इसी तरह यूरिया खाद 45 किलो की बोरी में आती है। जिसकी कीमत 267 रुपये है। मिलावटखोर राम गंगा खाद को मिलाकर नकली डीएपी खाद तैयार कर बाजार में खुलेआम बेच रहा था।
जानकारों के अनुसार एक डीएपी बोरी खाद के साथ दो से तीन बोरी राम गंगा खाद की मिलावटी डीएपी खाद तैयार की जाती रही। जिससे अच्छी मोटी रकम कमाई जा रही थी। अब आशंका जताई जा रही है कि यूरिया खाद में मिलावट धंधा तो नहीं किया जाता है। कार्रवाई के बाद दुकानों में बिकने वाली खाद को लेकर किसानों में चर्चाएं शुरू हैं। थाना प्रभारी श्रीप्रकाश यादव ने बताया कि जिला कृषि अधिकारी आरके वर्मा की तहरीर पर श्यामू केसरवानी के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई है। आरोपी की तलाश में दबिश दी जा रही है।
पिता के नाम दुकान, बेटा चला रहा गोदाम
चित्रकूट। रामकिशोर के नाम से चकौर गांव में दुकान पंजीकृत है। जबकि बेटा श्यामू केसरवानी लगभग पांच किमी दूरी सुरौंधा गांव में गोदाम में नकली डीएपी बनाता था। एसडीएम राम ऋषि रमन के नेतृत्व में की गई कार्रवाई में गोदाम में अलग-अलग ब्रांड की खाद मिली। जिसमें 3500 बोरी यूरिया 550 बोरी राम गंगा खाद, दो क्विटंल जिंक, 680 किलोग्राम सल्फर, 15 बोरी ग्लो प्लस, 189 राम गंगा की खाली बोरी, 104 भारत प्रोम की बोरी, डीएपी की खाली एक हजार बोरियां मिलीं।
दुकान के निलंबन की कार्रवाई की जा रही
चित्रकूट। जिला कृषि अधिकारी आर के वर्मा का कहना है कि खाद की बोरियां में यूपी का ही पंजीकरण है। यह पता नहीं है कि यह कहां से खाद लेता रहा है। इसकी जांच चल रही है। बताया कि मऊ क्षेत्र के चकौर गांव में श्यामू के पिता रामकिशोर के नाम से दुकान आवंटित है। जिसके निलंबन की कार्रवाई की जा रही है। उन्होंने बताया कि प्राइवेट दुकानों के लिए यूरिया खाद 8184.77 मैट्रिक टन, डीएपी 1953.75 व एनपीके 1287.7 मैट्रिक टन आवंटित की गई है।
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दुकान की खाद में किसान विश्वास नहीं करते
छिपनी गांव के किसान अच्छे लाल का कहना है कि दुकानों की खाद पर वह विश्वास नहीं करते है। ज्यादातर किसान समितियों से ही खाद लेते है। देखा गया कि यहां से खाद लेने पर फसल की पैदावार भी प्रभावित होती है।
अधिक कीमत में मिलती खाद
लालापुर गांव के किसान मतोला सिंह का कहना है कि दुकानों में अधिक कीमत में खाद बेची जाती है। यहां खाद लेने पर जिंक सहित बीज लेने के लिए भी अनिवार्य कर दिया जाता है। इससे किसान मजबूरी में समितियों में लाइन लगाने के लिए मजबूर है।