सिम की सप्लाई करने वालों की तलाश शुरू
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मानिकपुर क्षेत्र के जंगल में मौजूद पांच लाख 30 हजार का इनामी डाकू बबुली कोल मोबाइल के सिम बदलकर पुलिस को चकमा दे रहा है। कामयाबी मिलती न देख पुलिस अब सिम की सप्लाई करने वालों पर शिकंजा कसेगी, ताकि डाक ुओं तक नए सिम न पहुंच सकें।
पिछले गुरुवार को हुई मुठभेड़ के बाद से ही पुलिस अधिकारी टीम के साथ जंगल में डेरा डाले है। डाकुओं तक पहुंचने के लिए उनके मोबाइल नंबर सर्विलांस पर लगाकर यह पता करने की कोशिश कर रहे हैं कि डाकू किस क्षेत्र में छिपे हैं, लेकिन अभी तक खास सफलता नहीं मिल पाई है। डाकुओं की लोकेशन पुलिस को तभी मिलती है, जब डाकू मोबाइल का प्रयोग करते हैं। मोबाइल अक्सर स्विच आफ होने से कामयाबी नहीं मिल रही है। कामयाबी न मिलने पर पुलिस ने डाकुओं को संरक्षण देने वालों पर कार्रवाई शुरू कर दी है।
अपर एसपी बलवंत चौधरी ने बताया कि पुलिस सिम की सप्लाई करने वालों पर कार्रवाई के लिए एजेंसी डीलरों के रजिस्ट्रर आदि की जांच करेगी। इससे पता चल जाएगा कि जंगल क्षेत्र के कौन से लोग हैं, जो अधिक सिम खरीद रहे हैं।
सूचना प्रौद्योगिकी के जानकार बताते हैं कि मोबाइल में सिम बदलने पर भी सर्विलांस से मोबाइल की लोकेशन पता चल जाती है। मोबाइल के आईएमईआई नंबर से यह पता चल जाता है कि मोबाइल की लोकेशन क्या है। इस मामले में अपर एसपी बलवंत चौधरी ने बताया कि डकैत कौन सा मोबाइल प्रयोग कर रहे हैं, इसकी जानकारी नहीं है। उधर, सर्विलांस टीम प्रभारी श्रवण कुमार सिंह ने बताया कि हर मोबाइल में आईएमईआई नंबर होता है। मोबाइल चालू होते ही इसकी जानकारी तो होती है, लेकिन सर्विलांस से सिर्फ यही पता चलता है कि मोबाइल किस टावर के नेटवर्क में है। डकैतों के मोबाइल की भी यही जानकारी मिल रही है। टावर का एरिया चार से दस किमी तक होता है। बीच-बीच में मोबाइल स्विच आफ होने से सही लोकेशन नहीं मिल पा रही है।